“दुनिया रचने वाले को” एक अत्यंत भावुक और भक्ति भाव से भरा हुआ भजन है, जो ईश्वर की महानता, विनम्रता और समर्पण की भावना को दर्शाता है। यह भजन प्रभु को समर्पित एक ऐसी प्रार्थना है, जिसमें भक्त ईश्वर से कहता है कि जिसने पूरी सृष्टि बनाई है, उसे हम क्या अर्पित कर सकते हैं? यह गीत मन को शांत करता है, भक्ति जगाता है और ईश्वर के प्रति प्रेम व कृतज्ञता का गहरा संदेश देता है।
दुनिया रचने वाले को भगवान कहते है,
संकट हरने वाले को हनुमान कहते है |
हो जाते है जिसके अपने पराये, हनुमान उसको कंठ लगाये |
जब रूठ जाये संसार सारा, बजरंग बलि तब देते सहारा ||
अपने भक्तो का बजरंगी मान करते है |
संकट हरने वाले को हनुमान कहते है ||
दुनिया में काम कोई ऐसा नहीं है, हनुमानजी के जो बस में नहीं है |
जो चीज मांगो पल में मिलेगी, झोली ये खाली खुशियों से भरेगी |
सच्चे मन से जो भी इनका ध्यान करते है
संकट हरने वाले को हनुमान कहते है ||
कट जाये संकट इनकी शरण में, बैठ के देखो बजरंग के चरण में |
भक्त की बातो को झूठ मत मानो, फिर ना फसोंगे तुम जीवन मरण में ||
इनके सिने में सदा सियाराम रहते है
संकट हरने वाले को हनुमान कहते है ||
यह भजन हमें यह सिखाता है कि ईश्वर स्वयं सृष्टि के रचनाकार हैं—
वे सर्वशक्तिमान हैं, सर्वव्यापी हैं, और उनके सामने मनुष्य की हर वस्तु छोटी लगती है। भजन में भक्त ईश्वर से पूछता है कि हम आपको क्या भेंट करें, क्योंकि इस संसार की हर चीज तो आपने ही बनाई है। इस पंक्ति में विनम्रता, श्रद्धा और प्रभु के प्रति पूर्ण समर्पण का भाव है।
यह भजन मनुष्य को अहंकार से दूर रहने, कृतज्ञता रखने और हर स्थिति में प्रभु पर भरोसा रखने की प्रेरणा देता है।
यह भजन बताता है कि ईश्वर सृष्टि के रचयिता हैं और उनके सामने मानव को विनम्र रहना चाहिए।
हाँ, भजन समर्पण, कृतज्ञता और ईश्वर की महिमा का संदेश देता है।