Vijaya Ekadashi 2026 – तिथि, कथा, महत्व, पूजा विधि व उपवास नियम

Lord Vishnu Worship on Vijaya Ekadashi 2026 Festival

विजया एकादशी फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एक अत्यंत पुण्यदायी और विजयी फल प्रदान करने वाली एकादशी है। शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि Vijaya Ekadashi Vrat का पालन करने से जीवन में विजय, सफलता, पापों से मुक्ति और कठिन परिस्थितियों से छुटकारा मिलता है। पुराणों में यह व्रत भगवान राम द्वारा समुद्र पर सेतु बनाने से पहले किया गया था, जिसके प्रभाव से उन्हें लंका विजय में सफलता प्राप्त हुई। इस व्रत का फल कहा गया है कि यह साधक के सभी प्रकार के भय, बाधाएँ, रोग और निराशाएँ दूर करता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा तथा सौभाग्य लाता है। यह एकादशी व्यक्ति को कठोरतम दुर्भाग्यों से बचाती है और उसके व्यक्तित्व में तेज, शक्ति और निर्णय क्षमता बढ़ाती है।

Vijaya Ekadashi 2026 – तिथि एवं समय

विवरणसमय / तिथि
एकादशी तिथि प्रारंभ11 फरवरी 2026, दोपहर 12:03 बजे
एकादशी तिथि समाप्त12 फरवरी 2026, दोपहर 12:20 बजे
पारण का समय13 फरवरी 2026, सुबह 07:00 बजे से 09:15 बजे तक
द्वादशी तिथि समाप्त13 फरवरी 2026, रात 09:45 बजे

Vijaya Ekadashi Vrat Katha – विजया एकादशी की सम्पूर्ण कथा

त्रेता युग में जब भगवान श्रीराम सीता माता की खोज में वन-वन भटक रहे थे, तब उन्हें जटायु से यह ज्ञात हुआ कि रावण सीता का हरण कर लंका ले गया है। यह सुनकर श्रीराम अत्यंत चिंतित हुए और अपने भाई लक्ष्मण तथा वानर सेना सहित दक्षिण दिशा की ओर बढ़ने लगे। यात्रा के दौरान वे विशाल समुद्र के तट पर पहुँचे जहाँ लंका और भारत के बीच अथाह जलराशि थी। लंका पहुँचने का कोई मार्ग उनके पास नहीं था, और पूरी सेना को समुद्र पार कराना लगभग असंभव लग रहा था।

श्रीराम ने समुद्र देवता से मार्ग देने की प्रार्थना की, परंतु समुद्र शांत नहीं हुआ। दिन बीतते गए और समस्या जस की तस बनी रही। तब वानर राज सुग्रीव ने सुझाव दिया कि वे पास ही रहने वाले सागर ऋषि से मार्गदर्शन लें, क्योंकि वे व्रत, तप और अनुष्ठान के ज्ञाता थे। श्रीराम ऋषि के आश्रम पहुँचे और विनम्रता से अपनी समस्या कह सुनाई।

सागर ऋषि ने गंभीरता से श्रीराम की बात सुनी और बोले:
हे राम! इस कठिन परिस्थिति से बाहर निकलने का केवल एक उपाय है। यदि आप फाल्गुन कृष्ण पक्ष की विजया एकादशी का व्रत करें, तो इस व्रत के प्रभाव से आपको हर कार्य में विजय प्राप्त होगी। इसे करने से पाप नष्ट होते हैं, बाधाएँ हटती हैं और मनुष्य असंभव कार्य को भी संभव कर पाता है।

ऋषि ने व्रत की विधि बताई
एकादशी के दिन पूर्ण उपवास करें, भगवान विष्णु की पूजा करें, मंत्रजाप करें और देवताओं का ध्यान करते हुए रात्रि का समय भजन या जागरण में बिताएँ। द्वादशी के दिन पारण करके व्रत पूर्ण करें। इस व्रत का प्रभाव इतना महान है कि बड़े से बड़ा संकट भी दूर हो जाता है।

श्रीराम ने अत्यंत श्रद्धा और नियमों के साथ Vijaya Ekadashi Vrat किया। वे समुद्र तट पर ध्यानमग्न होकर भगवान विष्णु का नामजप करने लगे। एकादशी के पूरे दिन उन्होंने उपवास रखा और प्रभु की आराधना की। अगले दिन द्वादशी आने पर श्रीराम ने विधि-विधान के अनुसार पारण किया।

व्रत के पूर्ण होते ही समुद्र देवता ने स्वयं प्रकट होकर श्रीराम से कहा:
हे रघुकुलभूषण! आपके व्रत की शक्ति अद्भुत है। अब मैं आपकी सेना के लिए मार्ग प्रदान करूंगा।

इसके बाद नल और नील की अगुवाई में वानर सेना ने समुद्र पर सेतु का निर्माण किया, जिसे आज रामसेतु कहा जाता है। उसी मार्ग से श्रीराम, लक्ष्मण, हनुमान और पूरी सेना लंका पहुँची और रावण पर विजय प्राप्त की।

इस प्रकार, विजया एकादशी का व्रत भगवान श्रीराम की विजय का कारण माना गया है। जिस प्रकार इस व्रत ने श्रीराम की बाधाएँ दूर कर उन्हें सफलता दिलाई, उसी प्रकार यह व्रत आज भी साधक के जीवन में विजय, साहस, ऊर्जा और शुभ फल प्रदान करता है। पुराणों में कहा गया है कि जो भी इस व्रत को निष्ठा के साथ करता है, वह अपने जीवन की कठिन से कठिन परिस्थितियों पर भी विजय प्राप्त करता है।

Vijaya Ekadashi Puja Vidhi – पूजा विधि

विजया एकादशी की पूजा सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने से आरंभ होती है। घर में भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करके गंगाजल, चंदन, तुलसी पत्र, धूप, दीप, अक्षत, पंचामृत और नैवेद्य से पूजा करें। पूरे दिन फलाहार या जल के साथ व्रत रखें। Vijaya Ekadashi 2026 में विष्णु सहस्रनाम, विष्णु गायत्री मंत्र और रामनाम जप का विशेष महत्व बताया गया है। शाम को दीपदान करें और भजन-कीर्तन के साथ रात्रि जागरण करें। अगले दिन द्वादशी के पारण समय में स्नान के बाद भगवान विष्णु की आरती करके व्रत खोलें।

Vijaya Ekadashi Vrat Rules – व्रत के नियम

इस व्रत में सात्त्विकता, सत्य, संयम और शांति का पालन अनिवार्य है। अनाज, चावल, दाल, तामसिक भोजन तथा मांसाहार पूरी तरह वर्जित हैं। व्रत के दौरान अहिंसा, दया, भक्ति और पवित्र मानसिकता आवश्यक है। किसी भी प्रकार का क्रोध, झूठ, अपशब्द और नकारात्मक व्यवहार व्रत को अशुभ बनाते हैं। दिन भर भगवान विष्णु, श्रीराम और तुलसी माता का स्मरण करें। पारण के समय का पालन इस व्रत का सबसे महत्वपूर्ण नियम माना गया है।

क्या करें और क्या न करें

क्या करेंक्या न करें
विष्णु व रामनाम का जप करेंतामसिक भोजन, प्याज-लहसुन
फलाहार व सात्त्विक आचरण रखेंअनाज, चावल, दाल का सेवन
दीपदान व तुलसी पूजा करेंक्रोध, विवाद, अपशब्द
गरीबों को दान व सेवा करेंनकारात्मक विचार व आलस्य
रात में भजन या ध्यान करेंदेर रात तामसिक गतिविधियाँ

FAQs - Vijaya Ekadashi 2026

Q1. Vijaya Ekadashi 2026 व्रत का मुख्य लाभ क्या है?
Vijaya Ekadashi 2026 व्रत का मुख्य फल जीवन में विजय, सफलता और सभी बाधाओं से मुक्ति है। यह व्रत पापों का नाश करता है और साधक को भय, रोग और नकारात्मक शक्तियों से बचाता है। यह व्रत कठिन परिस्थितियों में भी मार्ग प्रशस्त करता है।
Vijaya Ekadashi Vrat Katha के अनुसार भगवान श्रीराम ने समुद्र पार करने और रावण पर विजय प्राप्त करने से पहले यह व्रत किया था। इसी व्रत के पुण्य से समुद्र शांत हुआ और सेतु निर्माण संभव हुआ। इसलिए यह व्रत विजय का प्रतीक माना जाता है।
हाँ, जो भक्त निर्जल उपवास नहीं कर पाते, वे फल, दूध, मेवा या सात्त्विक खाद्य पदार्थ ग्रहण कर सकते हैं। Vijaya Ekadashi 2026 में अनाज वर्जित है और मन की शुद्धता सबसे महत्वपूर्ण मानी गई है।
हाँ, Vijaya Ekadashi Vrat 2026 सभी के लिए समान रूप से फलदायी है। यह व्रत पारिवारिक शांति, करियर सफलता, मानसिक स्थिरता और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है।
Vijaya Ekadashi का पारण द्वादशी के शुभ समय में किया जाता है। स्नान, विष्णु पूजा और सात्त्विक भोजन के साथ व्रत खोलना चाहिए। सही समय पर पारण करने से व्रत का पूरा फल प्राप्त होता है।

विजया एकादशी कथा – YouTube वीडियो

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