Kamika Ekadashi 2026 – तिथि, कथा, महत्व, पूजा विधि और व्रत नियम

Kamika Ekadashi Vrat Katha – Complete Story in Hindi

कामिका एकादशी श्रावण मास के कृष्ण पक्ष में पड़ती है और इसे वर्ष की सबसे शुभ, पाप-नाशिनी और इच्छाएँ पूर्ण करने वाली एकादशियों में गिना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि Kamika Ekadashi का व्रत करने से मनुष्य के ह्रदय से द्वेष, पाप, क्रोध, अहंकार और नकारात्मकता समाप्त हो जाती है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए अत्यंत फलदायी है जो जीवन में शांति, सफलता, सौभाग्य और मनोकामना पूर्ति की इच्छा रखते हैं। इस व्रत का पुण्य स्वर्ग, यज्ञ, दान, तीर्थ और हजारों गौदान के बराबर माना गया है।

कामिका एकादशी व्रत से साधक के जीवन में सौभाग्य, आध्यात्मिक उन्नति, पारिवारिक समृद्धि और भगवान विष्णु की विशेष कृपा आती है। विशेष रूप से इस तिथि पर तुलसी पूजा, दीपदान और भजन-कीर्तन का अतुलनीय महत्व बताया गया है।

Kamika Ekadashi 2026 – तिथि, मुहूर्त व पारण समय

विवरणसमय / तिथि
एकादशी तिथि प्रारंभ01 जुलाई 2026, रात्रि 12:50 बजे
एकादशी तिथि समाप्त02 जुलाई 2026, रात 11:15 बजे
पारण का समय03 जुलाई 2026, सुबह 06:10 बजे से 08:34 बजे तक
द्वादशी तिथि समाप्त03 जुलाई 2026, शाम 05:40 बजे

Kamika Ekadashi Vrat Katha – कामिका एकादशी की सम्पूर्ण, विस्तृत कथा

पुराणों में वर्णित है कि प्राचीन काल में एक घना, पवित्र और तपोभूमि जैसा पर्वतीय क्षेत्र था, जहाँ कई साधु-संत, ऋषि-मुनि और साधक एकांत में साधना करते थे। उसी क्षेत्र के समीप एक गाँव था, जहाँ एक क्षत्रिय रहता था। वह जन्म से वीर, पराक्रमी और तेजस्वी था, लेकिन उसका स्वभाव अत्यंत कठोर, क्रोधी और उग्र था। गाँव के लोग उसकी शक्ति से तो प्रभावित थे, परंतु उसके क्रोध से भयभीत रहते थे।

एक दिन उस गाँव में रहने वाले एक वृद्ध, शांत स्वभाव के ब्राह्मण से किसी छोटी-सी बात पर क्षत्रिय का विवाद हो गया। क्रोध से अंधा होकर उसने ब्राह्मण पर प्रहार कर दिया और दुर्भाग्यवश ब्राह्मण की मृत्यु हो गई। जैसे ही क्षत्रिय का क्रोध शांत हुआ, उसे अपनी भूल का एहसास हुआ।

उस पर एक भारी बोझ आ गया — ब्राह्मण की हत्या, जिसे शास्त्रों में सबसे बड़ा पाप माना गया है।

वह अपराधबोध से इतना व्याकुल हो गया कि उसने घर छोड़ दिया और जंगलों में भटकने लगा। उसके मन में केवल एक ही विचार था अब मेरे जीवन का उद्धार कैसे होगा? क्या इतने बड़े पाप से मुक्ति संभव है? भटकते-भटकते वह एक दिन एक शांत वन में पहुँचा, जहाँ एक महान तपस्वी महर्षि वामदेव का आश्रम था। क्षत्रिय दूर से ही रोता हुआ उनके चरणों में गिर पड़ा। वामदेव ने उसकी स्थिति देखकर करुणा से कहा

पुत्र, उठो। बताओ, किस पीड़ा ने तुम्हें तोड़ दिया है?
क्षत्रिय ने रोते हुए पूरी घटना सुना दी – कि कैसे क्रोध में आकर उसने ब्राह्मण का वध कर दिया और अब वह अपने पाप से व्याकुल है।

वामदेव ने गहरी शांति से कहा
हे पुत्र! पाप चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, ईश्वर के शरण में आकर मनुष्य उसका प्रायश्चित्त कर सकता है। शास्त्रों में श्रावण कृष्ण पक्ष की एकादशी कामिका एकादशी को सबसे पवित्र, पाप-नाशिनी और मोक्षदायिनी कहा गया है।

वे आगे बोले
यदि तुम पूर्ण श्रद्धा, विनम्रता और पवित्रता के साथ इस एकादशी का व्रत करोगे, तो तुम्हारा ब्रह्महत्या जैसा महापाप भी नष्ट हो जाएगा। तुलसी के एक पत्ते से पूजा करने मात्र से वर्षों के पाप मिट जाते हैं। यह एकादशी स्वर्ग में भी पूजनीय है और इससे देवता भी संतुष्ट हो जाते हैं।

क्षत्रिय ने व्रत करने का दृढ़ निश्चय किया
जब श्रावण कृष्ण कामिका एकादशी का पावन दिन आया, क्षत्रिय ने प्रातः स्नान किया, शरीर को पवित्र किया और भगवान विष्णु के सामने बैठकर व्रत का संकल्प लिया। उसने पूरे दिन उपवास रखा, तूष्णी-भाव से ध्यान किया और तुलसी-दल अर्पित किया। उसके मन में अपार श्रद्धा और पश्चाताप था, और उसका हृदय शुद्ध हो रहा था।

रात्रि में उसने जागरण किया, भजन गाए और बार-बार भगवान विष्णु से क्षमा माँगी। उसका मन हल्का होने लगा, पाप का बोझ कम होने लगा, और उसे भीतर से एक अद्भुत शांति का अनुभव हुआ।

अगले दिन द्वादशी के पारण समय में जब उसने विधिपूर्वक व्रत पूर्ण किया, तभी उसके शरीर और मन में एक दिव्य प्रकाश का संचार हुआ। उसका अपराधबोध समाप्त हो गया, मन निर्मल हो गया और उसे ऐसा लगा जैसे प्रभु ने उसके पापों को जलाकर भस्म कर दिया हो।

वह ऋषि वामदेव के पास लौटा। उसके रूप में आश्चर्यजनक परिवर्तन देखकर ऋषि मुस्कुराए और बोले:
हे पुत्र, कामिका एकादशी संसार में पाप-नाशिनी के नाम से प्रसिद्ध है। जो भी इस व्रत को करता है, वह न केवल पापों से मुक्त होता है, बल्कि उसे लोक-परलोक में दिव्य सुख प्राप्त होता है।

क्षत्रिय पुनः अपने गाँव लौटा और सदा के लिए धर्म, भक्ति, सदाचार और अहिंसा के मार्ग पर चलने लगा। उसके जीवन में शांति, सरलता और प्रकाश लौट आया।

कामिका एकादशी इसलिए सर्वपाप-नाशिनी, सर्वकाम-प्रदायिनी, और विष्णुप्रीतिदायिनी कहलाती है।

Kamika Ekadashi Puja Vidhi – पूजा विधि

कामिका एकादशी के दिन प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र को गंगाजल से शुद्ध करें और पूजा में चंदन, धूप, दीप, पुष्प, तुलसी-दल, फल और नैवेद्य अर्पित करें। विशेषकर तुलसी इस एकादशी में अत्यंत पवित्र मानी जाती है, इसलिए तुलसी-दल और तुलसी-मंजरी अवश्य चढ़ाएँ। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना अत्यंत शुभ है। साधक को पूरे दिन उपवास रखना चाहिए और मन शांत, सात्त्विक और भक्तिपूर्ण होना चाहिए। रात्रि में दीपदान, तुलसी पूजा और भजन-कीर्तन का विशेष महत्व है। अगले दिन पारण समय में व्रत खोलना चाहिए।

Kamika Ekadashi Vrat Rules – व्रत के नियम

इस व्रत में सात्त्विकता, दया, अहिंसा और संयम का पालन अनिवार्य है। फाल्गुन शुक्ल एकादशी के दिन अनाज, चावल, दाल, मांसाहार, प्याज-लहसुन और तामसिक भोजन का सेवन वर्जित है। मन को शांत रखते हुए भगवान विष्णु का स्मरण करें। क्रोध, झूठ, लोभ, अपशब्द और किसी भी प्रकार की हिंसा से दूर रहें। आंवले के वृक्ष को प्रणाम करना और दान करना सबसे महत्वपूर्ण नियमों में से एक है। द्वादशी के पारण समय का पालन व्रत की सिद्धि के लिए अतिआवश्यक है।

क्या करें और क्या न करें

क्या करेंक्या न करें
विष्णु पूजा और मंत्रजपअनाज, दाल, चावल
तुलसी पूजन और दीपदानमांसाहार और तामसिक भोजन
भजन-कीर्तन और ध्यानक्रोध, विवाद
दान-पुण्य और सेवानकारात्मक विचार
रात्रि जागरणगलत संगति

FAQs - Kamika Ekadashi Vrat

Q1. Kamika Ekadashi 2026 का विशेष महत्व क्या है?
कामिका एकादशी पापों को नष्ट करने, मनोकामनाएँ पूर्ण करने और मानसिक शांति प्रदान करने वाली मानी जाती है। इसका व्रत करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

पुराणों में लिखा है कि आंवला भगवान विष्णु का प्रिय वृक्ष है और इसे उनकी ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। Amalaki Ekadashi Vrat में आंवले की पूजा करने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है।

अनाज, चावल, दाल, प्याज, लहसुन, तामसिक भोजन, मांसाहार, शराब और नकारात्मक व्यवहार का पूर्ण त्याग आवश्यक है।
हाँ, स्वास्थ्य के अनुसार सभी कर सकते हैं। कमजोर या बीमार लोग फलाहार लेकर भी व्रत कर सकते हैं—भाव और भक्ति सर्वोपरि है।
अगले दिन द्वादशी के पारण समय में पूजा करने के बाद सात्त्विक भोजन लेकर व्रत खोला जाता है। पारण का समय अत्यंत महत्वपूर्ण है।

कामिका एकादशी कथा – YouTube वीडियो

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