महाआरती, ध्वज वंदन और स्वाभिमान पर्व: सोमनाथ धाम में पीएम मोदी

सोमनाथ धाम में पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात दौरे के दौरान सोमनाथ धाम में भक्ति, श्रद्धा और सनातन स्वाभिमान का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। भगवान शिव के प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर में महाआरती के साथ पूरा मंदिर परिसर “हर हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा। प्रधानमंत्री ने विधि-विधान से भगवान सोमनाथ की पूजा-अर्चना की और राष्ट्र की सुख-शांति व समृद्धि की कामना की।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग में प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष महाआरती में सहभागिता की। आरती के दौरान मंदिर परिसर में दीपों की रोशनी, वैदिक मंत्रोच्चार और शंखनाद से आध्यात्मिक वातावरण और अधिक गहन हो गया। श्रद्धालुओं और संत समाज की उपस्थिति ने इस क्षण को ऐतिहासिक बना दिया।

महाआरती के पश्चात प्रधानमंत्री ने सोमनाथ मंदिर के ध्वज का पूजन किया और परंपरा के अनुसार ध्वज वंदन किया। यह ध्वज सनातन आस्था, निरंतरता और अडिग विश्वास का प्रतीक माना जाता है। प्रधानमंत्री का यह ध्वज पूजन उस परंपरा को आगे बढ़ाने वाला क्षण बना, जो सदियों से सोमनाथ धाम में चली आ रही है।

इस अवसर पर सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आयोजन भी किया गया। यह पर्व उस ऐतिहासिक स्मृति से जुड़ा है, जब लगभग 1000 वर्ष पूर्व सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण हुआ था। स्वाभिमान पर्व के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि आक्रमणों और विध्वंस के बावजूद भारतीय सनातन परंपरा और शिव भक्ति कभी समाप्त नहीं हुई।

प्रधानमंत्री मोदी ने स्वाभिमान पर्व को भारत की सांस्कृतिक चेतना और आत्मगौरव का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि यह भारतीय सभ्यता की आत्मा और पुनर्जागरण की प्रेरणा है। सोमनाथ ने बार-बार यह सिद्ध किया है कि आस्था को नष्ट नहीं किया जा सकता।

कार्यक्रम के दौरान संत-महात्माओं, पुजारियों और श्रद्धालुओं ने स्वाभिमान पर्व में भाग लिया। भजन-कीर्तन और वैदिक मंत्रों के बीच पूरे वातावरण में शिव भक्ति का भाव स्पष्ट दिखाई दिया। श्रद्धालुओं का मानना है कि प्रधानमंत्री का यह दौरा सनातन धर्म के प्रति सम्मान और आस्था को और अधिक सशक्त करता है।

प्रधानमंत्री के सोमनाथ दर्शन के बाद मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती दिखाई दी। भक्तों ने इसे एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण बताया। सोमनाथ धाम एक बार फिर यह संदेश देता नजर आया कि भारत की पहचान उसकी आस्था, संस्कृति और सनातन मूल्यों में निहित है।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग में महाआरती, ध्वज पूजन और स्वाभिमान पर्व का यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए आस्था, साहस और आत्मगौरव की प्रेरणा बनकर उभरा है।

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