कुछ त्योहार ऐसे होते हैं जो शोर से नहीं, एहसास से पहचाने जाते हैं। बैसाखी भी उन्हीं में से एक है। यह अचानक बहुत बड़े उत्सव की तरह नहीं आता, बल्कि धीरे-धीरे महसूस होता है सुबह की धूप में, खेतों की हवा में, और लोगों के चेहरों पर दिखती उस सुकून भरी मुस्कान में। खासकर पंजाब में, यह दिन जैसे पूरे माहौल को थोड़ा और जिंदा कर देता है।
अप्रैल के आसपास जब मौसम बदल रहा होता है न पूरी गर्मी, न पूरी ठंड तभी खेतों में गेहूं की फसल पककर तैयार खड़ी होती है। दूर तक फैले सुनहरे खेत ऐसे लगते हैं जैसे किसी ने धरती पर रोशनी बिछा दी हो। और यहीं से शुरू होता है बैसाखी का असली मतलब।
प्रश्न: बैसाखी कब मनाई जाती है?
उत्तर: बैसाखी हर साल 13 या 14 अप्रैल को मनाई जाती है।
प्रश्न: बैसाखी क्यों मनाई जाती है?
उत्तर: यह फसल कटाई का त्योहार है और सिख नव वर्ष की शुरुआत भी है।
प्रश्न: बैसाखी का धार्मिक महत्व क्या है?
उत्तर: इस दिन गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी।