कभीकभी जिंदगी में सब कुछ ठीक होते हुए भी अंदर एक बेचैनी रहती है। ना कोई बड़ी समस्या होती है, फिर भी मन शांत नहीं होता। ऐसे समय में हम बाहर समाधान ढूंढते हैं लेकिन कई बार जवाब अंदर ही छिपा होता है।

वरुथिनी एकादशी ऐसा ही एक दिन है, जो हमें धीरे से याद दिलाता है कि अगर हम खुद को थोड़ा संभाल लें, तो बहुत कुछ अपने आप ठीक होने लगता है।

13 अप्रैल को आने वाली यह एकादशी सिर्फ एक धार्मिक व्रत नहीं है यह एक छोटा सा ब्रेक है अपने मन, अपनी आदतों और अपने व्यवहार को समझने का।

वरुथिनी का मतलब ही है सुरक्षा

इस एकादशी का नाम ही अपने आप में बहुत कुछ कह देता है। वरुथिनी का अर्थ होता है रक्षा करने वाली।

लेकिन यह सुरक्षा बाहर से नहीं आती यह धीरेधीरे आपके अंदर बनती है।

जब आप एक दिन के लिए भी अपने मन को शांत रखते हैं, अपने व्यवहार को नियंत्रित करते हैं तो आप खुद को नकारात्मकता से बचाने लगते हैं। और शायद यही इस व्रत का असली मकसद है।

राजा मांधाता की कहानी जब सब कुछ होते हुए भी मुश्किल आई

इस दिन से जुड़ी एक कहानी है राजा मांधाता की।

कहते हैं कि वह बहुत अच्छे और न्यायप्रिय राजा थे। सब कुछ सही चल रहा था, लेकिन एक समय ऐसा आया जब उनके जीवन में कठिनाइयाँ शुरू हो गईं। तब उन्होंने एक ऋषि की सलाह पर वरुथिनी एकादशी का व्रत रखा।

धीरेधीरे उनकी परेशानियाँ कम होने लगीं और जीवन फिर से संतुलित हो गया। अगर इस कहानी को ध्यान से देखें, तो एक बात समझ आती है कभीकभी जिंदगी की उलझनें बाहर से नहीं, हमारे अंदर से सुलझती हैं।

व्रत सिर्फ भूखा रहना नहीं, खुद को समझना

बहुत लोग व्रत को सिर्फ खाना छोड़ने से जोड़ते हैं। लेकिन सच कहें तो, यह तो बस एक छोटा सा हिस्सा है।

वरुथिनी एकादशी हमें सिखाती है कि: सिर्फ पेट को नहीं, मन को भी शांत रखना जरूरी है सिर्फ खाने पर नहीं, विचारों पर भी कंट्रोल होना चाहिए इस दिन लोग अनाज और भारी भोजन से बचते हैं, कुछ लोग फलाहार करते हैं। लेकिन असली कोशिश यह होती है कि:

  • गुस्सा कम आए
  • मन इधरउधर कम भटके
  • और सोच थोड़ी साफ रहे

अगर आप यह कर पाए, तो व्रत अपने आप सफल हो जाता है।

पूजा जितनी सरल, उतनी सच्ची

इस दिन पूजा करने के लिए आपको बहुत बड़ी तैयारी की जरूरत नहीं होती। बस सुबह उठकर स्नान करें, भगवान विष्णु को याद करें, दीप जलाएं और थोड़ी देर शांति से बैठ जाएं।

कोई मंत्र बोलें या बस मन ही मन प्रार्थना करें। कई लोग  ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करते हैं। लेकिन सच यह है कि शब्दों से ज्यादा भावना मायने रखती है।

इस व्रत का असर धीरेधीरे महसूस होता है

कहा जाता है कि इस व्रत से:

  • पाप कम होते हैं
  • जीवन में सुखसमृद्धि आती है
  • और नकारात्मकता से रक्षा होती है

लेकिन अगर इसे आसान भाषा में समझें, तो यह व्रत आपको एक चीज देता है कंट्रोल। जब आप एक दिन के लिए भी खुद को संभाल लेते हैं, तो आपको महसूस होता है कि आप अपनी आदतों के मालिक हैं, गुलाम नहीं। और यही एहसास धीरेधीरे जिंदगी को आसान बना देता है।

थोड़ा झुकना, थोड़ा देना यही असली भक्ति है

इस दिन एक और खूबसूरत बात सिखाई जाती है विनम्रता और दान। अगर हो सके तो किसी जरूरतमंद की मदद करें थोड़ा सा भी खाना या वस्त्र दान करें

या बस किसी के साथ अच्छा व्यवहार करें यह छोटीछोटी चीजें ही असल में सबसे बड़ी होती हैं। क्योंकि जब आप किसी के लिए कुछ करते हैं, तो दिल अपने आप हल्का हो जाता है।

अंत में खुद को थोड़ा समय देना भी जरूरी है

वरुथिनी एकादशी आपसे बहुत कुछ नहीं मांगती।
बस थोड़ा सा समय और थोड़ा सा ध्यान।अगर आप इस दिन:

  • कुछ देर शांत बैठ जाएं
  • अपने मन को देखें
  • और खुद को थोड़ा बेहतर बनाने की कोशिश करें

तो यही काफी है। क्योंकि सच कहें तो, जिंदगी तब आसान लगने लगती है जब हम खुद को संभालना सीख जाते हैं।

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