हिंदू धर्म में वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान विष्णु के चतुर्थ अवतार भगवान नरसिंह की जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष Narasimha Jayanti 2026 कल गुरुवार, 30 अप्रैल को है। चतुर्दशी तिथि आज 29 अप्रैल की रात 07:51 बजे से प्रारंभ होकर कल 30 अप्रैल की रात 09:12 बजे तक रहेगी। चूँकि भगवान नरसिंह का प्राकट्य संध्याकाल में हुआ था, इसलिए उदयातिथि के आधार पर विद्वानों ने इस पर्व को 30 अप्रैल को ही मनाने का निर्णय लिया है।
इस वर्ष Narasimha Jayanti का सायंकाल पूजा मुहूर्त शाम 04 बजकर 17 मिनट से 06 बजकर 56 मिनट तक है। यही सर्वश्रेष्ठ पूजा समय है क्योंकि पुराणों के अनुसार भगवान नरसिंह इसी समय प्रकट हुए थे। मध्याह्न संकल्प का समय सुबह 10:59 बजे से दोपहर 01:38 बजे तक है। जो श्रद्धालु व्रत रखना चाहते हैं उनके लिए व्रत का पारण 1 मई 2026 को सुबह 05:41 बजे के बाद करना उचित है। Ekadashi Vrat की भाँति ही इस व्रत में भी रात्रि जागरण का विशेष महत्व माना जाता है।
पुराणों के अनुसार दैत्यराज हिरण्यकश्यिपु ने ब्रह्माजी से अद्भुत वरदान प्राप्त किया था — वह न दिन में मरे न रात में, न घर के अंदर न बाहर, न धरती पर न आकाश में, न किसी मनुष्य से न किसी पशु से, न किसी अस्त्र से न किसी शस्त्र से। इस वरदान के मद में चूर होकर उसने स्वयं को ही भगवान घोषित कर दिया और भगवान विष्णु की भक्ति पर रोक लगा दी।
किंतु उसका पुत्र प्रह्लाद जन्म से ही भगवान विष्णु का परम भक्त था। हिरण्यकश्यिपु ने प्रह्लाद को विष देने से लेकर हाथियों के नीचे कुचलवाने तक अनेक प्रकार के कष्ट दिए, परंतु भगवान की कृपा से प्रह्लाद हर बार सुरक्षित निकल आया। अंततः जब हिरण्यकश्यिपु ने खंभे पर प्रहार कर प्रह्लाद से पूछा — “बता, कहाँ है तेरा विष्णु?” — तो उसी क्षण भगवान विष्णु खंभे को चीरकर नरसिंह रूप में प्रकट हुए। आधे शेर और आधे मनुष्य के इस उग्र स्वरूप ने संध्याकाल में, देहरी पर बैठकर, अपनी जाँघ पर रखकर हिरण्यकश्यिपु का नख से वध किया और इस प्रकार ब्रह्माजी के वरदान की हर शर्त को पूरा करते हुए अपने भक्त की रक्षा की।
व्रत के पूर्व दिन अर्थात आज एक समय सात्विक भोजन करें। कल प्रातःकाल सूर्योदय से पहले स्नान करें और स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध कर भगवान नरसिंह की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर) से अभिषेक करें। पीले पुष्प, तुलसीदल, पीला चंदन और धूप-दीप अर्पित करें। सायंकाल 04:17 से 06:56 बजे के बीच विशेष आरती करें और रात्रि जागरण में भजन-कीर्तन करें। पूजा के बाद पवित्र मंदिर में दर्शन करने से विशेष फल मिलता है।
इस दिन “ॐ नमो भगवते नरसिंहाय” का जाप करना सर्वाधिक फलदायी माना जाता है। इसके अतिरिक्त “उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्।।” — यह नरसिंह मंत्र शत्रु बाधा दूर करने और भय से मुक्ति दिलाने के लिए अत्यंत प्रभावशाली है। “नरसिंह कवच” का पाठ करने से समस्त नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है।
इस दिन पूजा के पश्चात भगवान नरसिंह को दही, तरबूज या गुड़ का शरबत अर्पित करें — मान्यता है कि इससे वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं। ब्राह्मणों को भोजन कराएं और यथाशक्ति दक्षिणा दें। किसी जरूरतमंद को पीले वस्त्र, अनाज या तिल का दान करें। यदि किसी के जीवन में शत्रु बाधा या कोर्ट-कचहरी के मामले चल रहे हों तो इस दिन नरसिंह मंत्र का 108 बार जाप विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। जो श्रद्धालु Char Dham Yatra 2026 पर जाने की तैयारी कर रहे हैं, उनके लिए यह व्रत यात्रा से पूर्व विशेष फलदायी है।
भगवान नरसिंह भक्ति, आशा और दृढ़ता के परम प्रतीक हैं। यह पर्व हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति के सामने किसी भी शक्ति का अहंकार टिक नहीं सकता। वैशाख मास भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है और इसी मास में यह जयंती आना इसे और अधिक पवित्र बनाता है। इस दिन व्रत रखने और पूजन करने से जीवन की कठिनाइयाँ दूर होती हैं, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और मन को गहरी आध्यात्मिक शांति मिलती है।
व्रत पारण: नरसिंह जयंती का व्रत 1 मई 2026 को सुबह 05:41 बजे के बाद खोलें। उस दिन चतुर्दशी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगी इसलिए सूर्योदय के पश्चात पारण करना शास्त्रसम्मत है। अधिक Vrat Katha और पूजा विधि की जानकारी के लिए BhajanKatha का Vrat section अवश्य पढ़ें।