जब हम चारधाम की तैयारी करते हैं, तो दिमाग में सिर्फ मंदिर की छवि होती है। लेकिन सच तो ये है कि पहाड़ की इस यात्रा में भक्ति के साथ-साथ थोड़ी ‘सरकारी कागजी कार्रवाई’ और सावधानी भी बहुत जरूरी है। अगर आप बिना तैयारी के निकल गए, तो हो सकता है कि आपको ऋषिकेश या सोनप्रयाग से ही वापस आना पड़े। चलिए, बात करते हैं उन जरूरी चीजों की जो आपकी इस यात्रा को बिना किसी रुकावट के पूरी कराएंगी।
आजकल चारधाम जाने के लिए रजिस्ट्रेशन एकदम अनिवार्य है। इसे आप सरकार की वेबसाइट पर जाकर खुद कर सकते हैं या फिर हरिद्वार-ऋषिकेश में जो काउंटर बने होते हैं, वहां से करा सकते हैं। ऑनलाइन करना सबसे बेस्ट है क्योंकि वहां आपको एक QR कोड मिल जाता है।
एक छोटी सी टिप इस QR कोड का फोटो खींचकर फोन में तो रखें ही, पर एक कागज पर प्रिंट भी निकलवा लें। पहाड़ों में कब मोबाइल की बैटरी दगा दे जाए या नेटवर्क गायब हो जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। साथ में अपना असली आधार कार्ड जरूर रखें, क्योंकि हर चेक-पोस्ट पर इसकी मांग होती है।
पहाड़ों की सड़कें जितनी सुंदर हैं, उतनी ही खतरनाक भी। कई बार भीड़ बढ़ जाने पर पुलिस गाड़ियों को रोक देती है या रास्ता बदल देती है। ऐसे में चिढ़ने या बहस करने के बजाय उनकी बात मानें। वे लोग वहां आपकी सुरक्षा के लिए ही खड़े हैं।
खासकर केदारनाथ और यमुनोत्री जैसे रूट पर SDRF आपदा प्रबंधन की टीमें तैनात रहती हैं। अगर कभी मौसम खराब हो जाए या कहीं लैंडस्लाइड की खबर आए, तो जोश में आकर आगे बढ़ने की गलती न करें। प्रशासन जहां रुकने को कहे, वहीं रुक जाएं। महादेव के दर्शन तभी सफल हैं जब आप सुरक्षित घर लौटें।
अगर आप पैदल नहीं चल पा रहे हैं और घोड़ा या पालकी करना चाहते हैं, तो हमेशा सरकारी रेट लिस्ट चेक करें। हर पड़ाव पर इसके बोर्ड लगे होते हैं। अपनी रसीद जरूर लें और खच्चर वाले का नंबर या टोकन नंबर नोट कर लें।
रही बात हेलीकॉप्टर की, तो भाई साहब, यहाँ बहुत फ्रॉड होता है। लोग फेसबुक या वॉट्सऐप पर सस्ते टिकट का लालच देते हैं और पैसे ठग लेते हैं। सिर्फ और सिर्फ IRCTC की ऑफिशियल वेबसाइट से ही बुकिंग करें। किसी भी अनजान एजेंट के चक्कर में न पड़ें, वरना पैसे भी जाएंगे और दर्शन भी नहीं होंगे।
पहाड़ का मौसम किसी छोटे बच्चे जैसा है, कब हंसने लगे और कब रोने लगे (बारिश होने लगे), पता नहीं चलता। निकलने से पहले उस दिन का वेदर फॉरकास्ट जरूर देखें। अगर भारी बारिश का अलर्ट है, तो अपनी यात्रा को एक दिन के लिए टालना ही समझदारी है। अपने बैग में एक छोटा रेडियो या ऐसी कोई चीज रखें जिससे खबर मिलती रहे, क्योंकि बड़े पहाड़ों के बीच अक्सर इंटरनेट साथ छोड़ देता है।
पहाड़ों में डिजिटल इंडिया चलता तो है, पर नेटवर्क के भरोसे न रहें। अपने पास हमेशा थोड़ा कैश रखें। चाय-नाश्ते या छोटे खर्चों के लिए नकद ही काम आता है। अपने आधार कार्ड, रजिस्ट्रेशन और पैसों को एक प्लास्टिक की जिप-लॉक थैली में रखें ताकि अगर आप भीग भी जाएं, तो आपके जरूरी कागज सूखे रहें। बहुत ज्यादा गहने या कीमती सामान घर पर ही छोड़ आएं, क्योंकि भीड़-भाड़ में उन्हें संभालना एक अलग ही सिरदर्द बन जाता है।
यात्रा पर जाते समय अपने परिवार के किसी सदस्य का नंबर एक कागज पर लिखकर अपनी जेब या बैग में रखें। ये छोटी-छोटी बातें सुनने में मामूली लगती हैं, पर मुसीबत के समय यही सबसे बड़ी ढाल बनती हैं। बस, नियमों का पालन करें और मन में अटूट विश्वास रखें। पहाड़ों के राजा सब संभाल लेंगे।