यह केवल पूजा-अर्चना का पर्व नहीं, बल्कि मंत्र-जप, भजन और गहन साधना की पवित्र रात्रि है। यह वह समय है जब मन स्वाभाविक रूप से भीतर की ओर मुड़ता है और शिव-तत्त्व के साथ जुड़ने की तीव्र इच्छा जागृत होती है। पूरी रात जागकर जप, ध्यान और स्तुति करना शास्त्रों में अत्यंत फलदायी माना गया है।
इस रात्रि की साधना का उद्देश्य केवल अनुष्ठान पूरा करना नहीं, बल्कि अहंकार का क्षय, मन की शुद्धि और आत्म-जागरण है।
महाशिवरात्रि पर सबसे अधिक जपा जाने वाला मंत्र है। ॐ नमः शिवाय, यह पंचाक्षरी मंत्र शिव–तत्त्व का सार है।
ॐ सृष्टि की मूल ध्वनि है। नमः का अर्थ है नमन या समर्पण। शिवाय का अर्थ है उस कल्याणकारी चेतना को।
जब हम ॐ नमः शिवाय का जप करते हैं, तो हम अपने अहंकार को शिव–चेतना के चरणों में अर्पित करते हैं। यह मंत्र मन की अशांति को शांत करता है और भीतर स्थिरता लाता है। महाशिवरात्रि की रात इस मंत्र का जप विशेष प्रभावशाली माना जाता है, क्योंकि वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा अधिक सक्रिय रहती है। सामूहिक जप से सकारात्मक ऊर्जा कई गुना बढ़ जाती है।
महाशिवरात्रि पर केवल पंचाक्षरी मंत्र ही नहीं, बल्कि कई अन्य स्तोत्रों और मंत्रों का भी पाठ किया जाता है।
यह मंत्र शिव की दिव्य चेतना को जागृत करने का माध्यम है। इसका जप बुद्धि को शुद्ध और स्थिर बनाता है।
इन स्तोत्रों का पाठ भक्ति और ऊर्जा दोनों को संतुलित करता है। विशेषकर महामृत्युंजय मंत्र स्वास्थ्य और मानसिक शांति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
महाशिवरात्रि की रात जागरण का विशेष महत्व है। परंतु जागरण का अर्थ केवल जागते रहना नहीं, बल्कि जागरूक रहना है।
पूरी रात को चार प्रहरों में बाँटकर हर प्रहर में :-
ध्यान करते समय शिव के निराकार स्वरूप या शिवलिंग पर मन को केंद्रित करें। कल्पना करें कि आपके भीतर का अंधकार धीरे–धीरे प्रकाश में बदल रहा है।
शिव–तत्त्व पर ध्यान का अर्थ है :-
जब मन शांत हो जाता है, तब शिव की उपस्थिति का अनुभव सहज हो जाता है।
यदि आप इस महाशिवरात्रि को साधना के रूप में मनाना चाहते हैं, तो एक सरल और प्रभावी दिनचर्या अपना सकते हैं।
प्रातःकाल स्नान के बाद संकल्प करें कि आप इस दिन को आत्म–शुद्धि और शिव–चिंतन के लिए समर्पित करेंगे।
कम से कम 1 से 5 माला ॐ नमः शिवाय का जप करें।
यदि संभव हो, तो हर प्रहर में एक माला जपें। जप करते समय ध्यान श्वास पर रखें, ताकि मन भटके नहीं।
रात्रि में 15–30 मिनट के दो या तीन ध्यान सत्र रखें।
मन में शिव का नाम दोहराएँ।
बीच–बीच में शिव भजन सुनें या गाएँ। भक्ति और ध्यान का संतुलन साधना को पूर्ण बनाता है।
महाशिवरात्रि आत्म–परिवर्तन की रात्रि है। इस दिन एक नकारात्मक आदत छोड़ने या एक सकारात्मक गुण अपनाने का संकल्प लें जैसे क्रोध कम करना, नियमित ध्यान करना या सत्य बोलना।
मंत्र–जप और भजन केवल शब्द नहीं हैं; वे ऊर्जा के माध्यम हैं। जब हम श्रद्धा से जप करते हैं, तो हमारी चेतना धीरे–धीरे शुद्ध होती है। महाशिवरात्रि की रात हमें यह सिखाती है कि शिव कहीं बाहर नहीं, बल्कि हमारे भीतर ही हैं। मंत्र–जप से मन शांत होता है, ध्यान से आत्मा जागती है और भक्ति से हृदय पवित्र होता है।
इस महाशिवरात्रि, केवल अनुष्ठान तक सीमित न रहें। मंत्र को केवल शब्द न मानें, उसे अनुभव करें। भजन को केवल गीत न समझें, उसे हृदय की भावना बनाएं। पूरी रात जागकर यदि आप कुछ क्षण भी सच्चे मौन में बैठ पाए, तो वही आपकी सबसे बड़ी साधना होगी। क्योंकि जब मन शांत होता है और अहंकार मिटता है, तब भीतर से एक ही ध्वनि सुनाई देती है ॐ नमः शिवाय।