जब यह पवित्र रात करीब आती है, तो मन अपने-आप ही शांत होने लगता है। यह सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि वह समय है जब हम कुछ देर के लिए दुनिया की भागदौड़ से हटकर शिव की शरण में बैठते हैं। दीपक की लौ, जलाभिषेक की धारा और मंत्रों की ध्वनि मिलकर एक ऐसा माहौल बनाते हैं, जहाँ मन हल्का और स्थिर महसूस करता है।

इस रात पूजा केवल परंपरा निभाना नहीं होती, बल्कि श्रद्धा से जुड़ा एक अनुभव बन जाती है। सही विधि और शुभ मुहूर्त में की गई आराधना मन को गहरी शांति देती है और भीतर एक अलग ही संतोष का भाव जगा देती है।

व्रत का प्रारम्भ और परान समय

महाशिवरात्रि का व्रत भोर होते ही आरंभ कर देना चाहिए, यानि सूर्य उदय से पहले या जैसे ही प्रातःकाल का आरंभ हो, उसी समय से व्रत शुरू करें। व्रत दिनभर और रात्रि तक जारी रहना चाहिए। इस व्रत में संकल्प, उपवास, शिवपूजा और जागरण शामिल हैं।

पूजा और जागरण के पूरे चक्र के बाद अगले दिन परान उपवास तोड़ना निर्धारित समय के अनुसार किया जाता है। यह समय स्थान के अनुसार बदल सकता है, लेकिन प्रायः प्रातः काल के पूर्वाह्न समय में उपवास तोड़ा जाता है। स्थानीय पंचांग में परान का शुद्ध समय देखना सर्वोत्तम होता है, ताकि व्रत विधिपूर्वक पूर्ण हो।

महाशिवरात्रि 2026: दिनांक और मुख्य मुहूर्त

साल 2026 में महाशिवरात्रि 15–16 फरवरी की रात को मनाई जा रही है। इस पावन रात्रि का मध्य रात्रि या निशीथ काल सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है, जिसमें शिव-पूजा का विशेष फल मिलता है।

मुख्य निशीथ मुहूर्त

निशीथ काल पूजा समय: लगभग 12:09 AM से 01:01 AM (16 फरवरी, 2026) तक यह समय स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकता है, अतः अपने नगर का पंचांग अवश्य देखें।

निशीथ काल के अतिरिक्त पूरी रात को चार प्रहरों में विभाजित कर पूजा करने की परंपरा भी प्राचीन शास्त्रों में उल्लिखित है, ताकि शिव की कृपा और अधिक उपलब्ध हो।

चार प्रहर की रात्रि पूजा प्रणाली

परंपरा के अनुसार महाशिवरात्रि की रात चार प्रहरों में विभाजित होती है : –

प्रथम प्रहर: सूर्यास्त के समय से आधी रात से पहले तक

द्वितीय प्रहर: आधी रात तक

तृतीय प्रहर: निशीथ काल 

चतुर्थ प्रहर: निशीथ के बाद सुबह तक

इन चारों प्रहरों में अभिषेक, मंत्रजप, भजन, और ध्यान विशेष रूप से किया जाता है। हर प्रहर में शिवलिंग पर अलगअलग सामग्री से अभिषेक करने की परंपरा है जिससे रात्रि भर शिव की पूजा होती रहे और भक्त की चेतना निरंतर शिवचिंतन में स्थित रहे।

घर पर महाशिवरात्रि पूजा विधि

घर में महाशिवरात्रि की पूजा सरल उपादानों से भी सुंदरता और भक्ति के साथ की जा सकती है। इसके लिए निचे दिए गये चरणों का पालन करें:

1. संकल्प और स्नान

पूजा की शुरुआत संकल्प से होती है। मन में ईमानदारी से शिवभक्ति का संकल्प लें। उसके बाद स्वच्छ स्नान करें। पूजा के समय सफेद या हल्के रंग के वस्त्र पहनें, ताकि मन और वातावरण दोनों शुद्ध रहें।

2. शिवलिंग या चित्र की स्थापना

एक साफ स्थान पर शिवलिंग या भगवान शिव का चित्र स्थापित करें। सामने दीपक रखें और अगर संभव हो तो धूप/अगरबत्ती जलाएं। स्थापना के समय नीचे ध्यान रखें पूजा का स्थान शुद्ध, शांत और व्यवस्थित हो।

3. अभिषेक पाँच मूल द्रव्यों से

अब शिवलिंग पर अभिषेक करें। उसे शुद्ध जल से स्नान करवाने के बाद निम्न सामग्री से क्रमशः अभिषेक करें:

  • जल (जलाभिषेक)
  • दूध (दुग्धाभिषेक)
  • दही (दधि)
  • शहद
  • घी
  • सुगंधित तिल और चावल

इन द्रव्यों से अभिषेक करते समय प्रत्येक वस्तु शिवलिंग पर डालें और मन में शिवभक्ति तथा शांति की अनुभूति करें।

4. द्वारा और पुष्प सामग्री

बेलपत्र शिवजी को अत्यंत प्रिय हैं। अभिषेक के पश्चात बेलपत्र चढ़ाएं। धतूरा, मालती पुष्प, चंदन, गुलाब के फूल अथवा अन्य सात्विक फूलों का भी पूजन में उपयोग करें।

5. मंत्रजप और ध्यान

पूजा का सबसे महत्त्वपूर्ण भाग है मंत्रजप और ध्यान। शिवपूजा के दौरान निम्न मंत्रों का जप करें:

  • ॐ नमः शिवायपंचाक्षर मंत्र
  • शिव गायत्री मंत्रयदि आप जानते हैं, तो उसका भी जप करें

रुद्राभिषेक स्तोत्रयदि संभव हो तो

जप करते समय मन को शांत रखें, साँसों की लय को स्थिर बनाएं और ध्यान इस भावना पर केंद्रित करें कि आप स्वयं शिवचेतना में विलीन हो रहे हैं।

पूजा के बाद की विधि

पूजा सम्पन्न होने पर शिवजी के नाम का हमेशा आदरपूर्वक स्मरण करें। पूजा सामग्री (फल, पुष्प आदि) को स्वयं ग्रहण न करें; उसे पहले प्रसाद समझकर आँख बंद कर संस्कृत मंत्र ॐ का उच्चारण करें, फिर ग्रहण करें। उपवास के बाद निर्धारित समय पर परान करें और भोजन सात्विक रखें।

अंतिम संदेश

महाशिवरात्रि की पूजा विधि, मुहूर्त और समय का पालन केवल परंपरा नहीं, बल्कि वह मार्ग है जो शिवचिंतन, ध्यान और आत्मिक जागरण की ओर ले जाता है। यह रात जीवन में संतुलन, शांति और चेतना की आलोकिक अनुभूति देने वाली है।

इस महाशिवरात्रि पर अपने हृदय में शिव की भक्ति को स्थान दें, समय का सम्मान करें और पूर्ण समर्पण के साथ पूजाअर्चना करें। शिव की कृपा आपके जीवन को नव ऊर्जा और आनंद से भर दे।

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