चैत्र नवरात्रि केवल भारत तक सीमित नहीं है। जहाँ-जहाँ भारतीय समुदाय बसे हैं, वहाँ यह पर्व पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, दुबई, सिंगापुर और अन्य देशों में बसे प्रवासी भारतीय इन नौ दिनों को अपनी संस्कृति और आस्था से जुड़े रहने का एक विशेष अवसर मानते हैं।
विदेश में रहकर भी लोग अपनी परंपराओं को जीवित रखते हैं और अगली पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से परिचित कराते हैं। नवरात्रि उनके लिए केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़े रहने का माध्यम भी है।
अमेरिका, कनाडा और यूरोप के कई शहरों में बड़े हिंदू मंदिर स्थापित हैं, जहाँ चैत्र नवरात्रि के दौरान विशेष आयोजन होते हैं। इन मंदिरों में प्रतिदिन माँ दुर्गा की आरती, दुर्गा सप्तशती पाठ, भजन-कीर्तन और सामूहिक प्रार्थना की जाती है।
कई स्थानों पर हर शाम सामूहिक आरती होती है, जिसमें परिवार सहित लोग शामिल होते हैं। बच्चों और युवाओं के लिए विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं, ताकि वे देवी की कथा और नवरात्रि के महत्व को समझ सकें।
कुछ मंदिरों में नौ दिनों तक अलग-अलग देवी स्वरूपों की सजावट की जाती है। अंतिम दिनों में विशाल भंडारे या सामूहिक भोजन का आयोजन होता है, जहाँ सभी लोग मिलकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। यह सामूहिकता और एकता का सुंदर दृश्य होता है।
नवरात्रि के नौवें दिन राम नवमी का विशेष महत्व होता है। विदेशों में भी इस दिन भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव को बड़े उत्साह से मनाया जाता है।
मंदिरों में राम जन्म की झांकी सजाई जाती है। दोपहर के समय विशेष पूजा, कीर्तन और सत्संग आयोजित किए जाते हैं। कुछ स्थानों पर रामायण पाठ या सुंदरकांड का सामूहिक पाठ भी होता है।
इस दिन भक्तजन राम नाम का कीर्तन करते हैं और विशेष प्रसाद वितरित किया जाता है। कई परिवार इस अवसर पर पारंपरिक वस्त्र पहनकर मंदिर जाते हैं। इस प्रकार विदेश में भी राम नवमी भारतीय परंपरा और आस्था की जीवंत झलक प्रस्तुत करती है।
विदेशों में रहने वाले लोगों के लिए व्रत का पालन करना कभी-कभी थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि सभी पारंपरिक सामग्री आसानी से उपलब्ध नहीं होती। फिर भी लोग स्थानीय सामग्री का उपयोग करके व्रत का भोजन तैयार करते हैं।
उदाहरण के लिए, जहाँ कुट्टू का आटा या सिंहाड़े का आटा आसानी से न मिले, वहाँ लोग ग्लूटेन-फ्री आटे का उपयोग करते हैं। साबूदाना या विशेष मसाले भारतीय स्टोर से खरीदे जाते हैं। कई लोग घर पर ही व्रत के नमकीन या मिठाई तैयार करते हैं।
आलू, मूंगफली, दही, फल और दूध जैसी चीजें तो लगभग हर देश में उपलब्ध होती हैं, इसलिए फलाहार का पालन अपेक्षाकृत सरल रहता है। इस तरह श्रद्धा के साथ थोड़ी रचनात्मकता जोड़कर व्रत की परंपरा निभाई जाती है।
विदेशों में नवरात्रि केवल पूजा तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह सामुदायिक सहयोग और सेवा का भी अवसर बन जाती है। मंदिरों में स्वयंसेवक सजावट, भोजन वितरण, जूते व्यवस्थित रखने, सफाई और कार्यक्रम आयोजन में मदद करते हैं।
सेवा भाव को विशेष महत्व दिया जाता है। कई लोग दान देते हैं ताकि आयोजन सुचारु रूप से चल सके। कुछ परिवार प्रसाद बनाने या भंडारे में सहयोग करने का दायित्व लेते हैं।
सामुदायिक शिष्टाचार का भी ध्यान रखा जाता है जैसे समय पर पहुँचना, शांतिपूर्वक आरती में शामिल होना, मंदिर के नियमों का पालन करना और सभी के साथ सम्मानपूर्ण व्यवहार करना। विदेशों में रहने वाले भारतीय इस अवसर को एकता और सहयोग के उत्सव के रूप में देखते हैं।
विदेशों में चैत्र नवरात्रि मनाना केवल धार्मिक परंपरा निभाना नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखना भी है। माता-पिता अपने बच्चों को देवी की कथा सुनाते हैं, उन्हें आरती सिखाते हैं और भारतीय त्योहारों का महत्व समझाते हैं।
इस प्रकार नवरात्रि एक सेतु बन जाती है जो भारत से हजारों किलोमीटर दूर रहकर भी लोगों को अपनी मिट्टी, अपनी संस्कृति और अपनी आस्था से जोड़े रखती है।
चैत्र नवरात्रि का उत्सव चाहे भारत में हो या विदेशों में, इसकी भावना एक ही रहती है श्रद्धा, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा। प्रवासी भारतीयों के लिए यह पर्व अपनी जड़ों को याद करने, समुदाय के साथ जुड़ने और नई पीढ़ी को भारतीय संस्कार देने का पावन अवसर है। यही कारण है कि नवरात्रि सीमाओं से परे, पूरी दुनिया में आस्था का प्रकाश फैलाती है।