Geeta Jayanti 2025 का पावन पर्व हर वर्ष पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी मोक्षदा एकादशी के दिन मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिव्य दिन कुरुक्षेत्र के मैदान में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद् गीता का ज्ञान दिया था। यही कारण है कि यह तिथि हिंदू धर्म में ज्ञान, धर्म और मोक्ष का प्रतीक मानी जाती है
इस दिन भगवान कृष्ण को तुलसी, गंगा जल, मक्खन-मिश्री और पीले फूल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना गया है।
गीता जयंती केवल एक पर्व नहीं बल्कि जीवन को सही दिशा देने का अवसर है। गीता के उपदेश व्यक्ति को धर्म, कर्तव्य, विवेक और आत्म-ज्ञान के मार्ग पर चलना सिखाते हैं। आधुनिक जीवन की भागदौड़ में गीता का ज्ञान तनाव को दूर कर मन में स्थिरता और सकारात्मकता लाता है। इस दिन गीता पाठ, मंत्रजाप, ध्यान और सत्संग करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
क्या करें
श्रीमद्भगवद गीता का पाठ या कम से कम एक अध्याय जरूर पढ़ें।
क्या न करें
देश के कई शहरों में गीता महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। विशेष रूप से कुरुक्षेत्र और अहमदाबाद में बड़े स्तर पर कार्यक्रम, गीता पाठ, भजन संध्या और शोभा यात्राएँ निकाली जाएँगी। कई मंदिरों में 18 अध्यायों का सामूहिक पाठ और यज्ञ का आयोजन होगा। भक्त सोशल मीडिया पर भी शुभकामनाएँ, गीता श्लोक और प्रेरणादायक संदेश शेयर कर रहे हैं।
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन – कर्म करो, फल की चिंता मत करो।
अहिंसा परमो धर्मः – अहिंसा सर्वोच्च धर्म है।
शांतिः परमं सुखम् – शांति सर्वोच्च सुख है।
योगस्थः कुरु कर्माणि – योग में स्थित होकर कर्म करो।
मद्भक्तो भव – ईश्वर में पूर्ण भक्ति रखो।
विनय ही ज्ञान की पहचान है।
जो हुआ वह अच्छे के लिए हुआ।
आत्मा न जन्म लेती है, न मरती है।
मन को नियंत्रण में रखना ही सच्चा तप है।
सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने वाला कभी पराजित नहीं होता।