प्रयागराज में आयोजित होने वाले माघ मेला 2026 को लेकर आस्था और आध्यात्मिकता का माहौल लगातार गहराता जा रहा है। इस बार मेला क्षेत्र में रुद्राक्ष से निर्मित शिवलिंगों का निर्माण विशेष आकर्षण के रूप में किया जा रहा है। शिव भक्ति से जुड़े इन शिवलिंगों को पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तैयार किया जा रहा है, जिससे पूरे मेला क्षेत्र में भक्ति का विशेष वातावरण बन गया है।
माघ मेले की तैयारियों के बीच योगी आदित्यनाथ शनिवार को प्रयागराज पहुँचे। यहाँ उन्होंने सबसे पहले त्रिवेणी संगम में पवित्र स्नान किया। संगम स्नान के बाद मुख्यमंत्री ने विधि-विधान से त्रिवेणी की पूजा-अर्चना की और माँ गंगा की आरती उतारी। संगम तट पर इस दौरान श्रद्धालुओं की बड़ी मौजूदगी देखने को मिली और पूरे क्षेत्र में आस्था का भाव स्पष्ट नजर आया।
इसके बाद मुख्यमंत्री अरैल घाट से नाव के माध्यम से संगम नोज तक पहुँचे। रास्ते में उन्होंने यमुना नदी में मौजूद प्रवासी पक्षियों को दाना खिलाया, जिसे पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री की इस पहल की संगम क्षेत्र में मौजूद श्रद्धालुओं ने सराहना की।
संगम दर्शन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज स्थित हनुमान जी के मंदिर में दर्शन-पूजन किया और विधि-विधान से आरती की। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रही और पूरे वातावरण में भक्ति का भाव दिखाई दिया। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।
इसके पश्चात मुख्यमंत्री श्रीमठ जगद्गुरु रामानंदाचार्य जी के 726वें प्राकट्य महोत्सव में शामिल होने पहुँचे। यहाँ उन्होंने सतुआ बाबा के शिविर में साधु-संतों के साथ भोजन किया और संत समाज से संवाद किया। संतों ने मुख्यमंत्री का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया और माघ मेले को लेकर अपने अनुभव साझा किए।
मुख्यमंत्री ने इसी दौरान प्रयागराज में चल रहे माघ मेले की तैयारियों की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और स्वच्छता में किसी प्रकार की कमी न हो। मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या जैसे प्रमुख स्नान पर्वों को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाओं को और मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।
माघ मेले के दौरान संगम घाटों पर रोजाना लाखों श्रद्धालु पवित्र स्नान कर रहे हैं। कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं दिख रही है। तड़के सुबह से ही संगम तट पर स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगती है और दिन भर यह सिलसिला जारी रहता है।
संगम की रेत पर साधु-संत, अखाड़े और कल्पवासी डेरा जमाए हुए हैं। स्नान के बाद भजन-कीर्तन, ध्यान और धार्मिक अनुष्ठान लगातार हो रहे हैं। माघ मेला विदेशी श्रद्धालुओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है और कई विदेशी भक्त संगम तट पर साधना और भक्ति में लीन नजर आ रहे हैं।
प्रशासन के अनुसार, आने वाले दिनों में प्रमुख स्नान पर्वों के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, स्वच्छता और चिकित्सा सुविधाओं को लेकर विशेष इंतज़ाम किए गए हैं। माघ मेला 2026 एक बार फिर प्रयागराज को भक्ति, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना के केंद्र के रूप में स्थापित करता दिखाई दे रहा है।
| अवसर / स्नान पर्व | तिथि (2026) | धार्मिक महत्व |
|---|---|---|
| पौष पूर्णिमा | 3 जनवरी 2026 (शनिवार) | इसी दिन से माघ मेले का विधिवत शुभारंभ होता है। श्रद्धालु कल्पवास प्रारंभ करते हैं और संगम में पहला पवित्र स्नान करते हैं। |
| मकर संक्रांति (शाही स्नान) | 14 जनवरी 2026 (बुधवार) | यह माघ मेले का पहला प्रमुख शाही स्नान पर्व होता है। इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। |
| मौनी अमावस्या | 18 जनवरी 2026 (रविवार) | माघ मेले का सबसे पवित्र और सर्वाधिक भीड़ वाला स्नान पर्व। इस दिन मौन रहकर स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति मानी जाती है। |
| बसंत पंचमी | 23 जनवरी 2026 (शुक्रवार) | यह दिन विद्या और ज्ञान की देवी माँ सरस्वती को समर्पित होता है। बसंत ऋतु के आगमन और नए आरंभ का प्रतीक माना जाता है। |
| माघी पूर्णिमा | 1 फरवरी 2026 (रविवार) | इस दिन कल्पवास पूर्ण करने वाले श्रद्धालु एक पूर्ण चंद्र मास की साधना के बाद अंतिम प्रमुख स्नान करते हैं। |
| महाशिवरात्रि | 15 फरवरी 2026 (रविवार) | भगवान शिव को समर्पित यह पर्व माघ मेले का अंतिम और अत्यंत महत्वपूर्ण स्नान पर्व होता है। इस दिन संगम स्नान को मोक्षदायी माना जाता है। |