विषु केरल में मनाया जाने वाला मलयालम नववर्ष है। वर्ष 2026 में विषु 14 अप्रैल, मंगलवार को मनाया जाएगा। यह दिन मलयालम कैलेंडर के “मेष संक्रांति” से जुड़ा है और नए साल की आधिकारिक शुरुआत माना जाता है।
विषु केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि जीवन में शुभता, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का स्वागत करने का अवसर है। केरल में यह पर्व पारंपरिक रीति-रिवाजों, परिवार के मिलन और आध्यात्मिक भावनाओं के साथ मनाया जाता है।
विषु का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है विषु कानी। कानी का अर्थ है पहली झलक। मान्यता है कि वर्ष की पहली सुबह जो दृश्य देखा जाता है, वही पूरे वर्ष की दिशा तय करता है।
विषु कानी में आमतौर पर इन वस्तुओं को सजाया जाता है:
सुबह सूर्योदय से पहले परिवार के बड़े सदस्य बच्चों की आंखें बंद कर उन्हें पूजा कक्ष में ले जाते हैं, जहां वे सबसे पहले विषु कानी का दर्शन करते हैं। यह शुभता, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
विषु के दिन एक और महत्वपूर्ण परंपरा है विषु कैनीट्टम। इसमें परिवार के बड़े सदस्य छोटे बच्चों और युवाओं को धन या उपहार देते हैं। यह केवल आर्थिक भेंट नहीं, बल्कि आशीर्वाद और स्नेह का प्रतीक है। बच्चे नए कपड़े पहनते हैं और परिवार के साथ समय बिताते हैं।
विषु कैनीट्टम का उद्देश्य यह संदेश देना है कि नए वर्ष की शुरुआत प्रेम, आशीर्वाद और सकारात्मक सोच के साथ होनी चाहिए।
केरल के मंदिरों में विषु के दिन विशेष पूजा-अर्चना होती है। विशेषकर भगवान कृष्ण के मंदिरों में भक्तों की भीड़ रहती है।
मंदिरों में:
कई लोग सुबह विषु कानी देखने के बाद सीधे मंदिर जाकर भगवान का आशीर्वाद लेते हैं। यह दिन आध्यात्मिक रूप से अत्यंत शुभ माना जाता है।
विषु के उत्सव में पारंपरिक आतिशबाजी भी शामिल होती है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चे और युवा पटाखे जलाकर खुशी मनाते हैं।
इस दिन घरों में विशेष भोज तैयार किया जाता है, जिसे विषु साद्या कहा जाता है। केले के पत्ते पर परोसा जाने वाला यह भोजन विभिन्न व्यंजनों से भरपूर होता है, जैसे:
ग्रामीण इलाकों में लोग पारंपरिक संगीत, लोकनृत्य और सामूहिक कार्यक्रमों के माध्यम से उत्सव मनाते हैं। पूरा वातावरण उल्लास और रंगों से भर जाता है।
विषु का मूल संदेश है शुभ शुरुआत। वर्ष की पहली झलक हमें यह सिखाती है कि जीवन में सकारात्मकता का कितना महत्व है।
सोना और अन्न की व्यवस्था समृद्धि का प्रतीक है, दीपक प्रकाश और आशा का प्रतीक है, और दर्पण यह याद दिलाता है कि भविष्य हमारी सोच और कर्मों पर निर्भर करता है।
विषु हमें यह प्रेरणा देता है कि हम हर नई शुरुआत को विश्वास और आशावाद के साथ अपनाएं।
आज के तेज़ जीवन में भी विषु की परंपराएं जीवित हैं। शहरों में रहने वाले लोग भी घर पर छोटा सा विषु कानी सजाकर और परिवार के साथ समय बिताकर इस पर्व को मनाते हैं।
विदेशों में बसे केरलवासी भी सामुदायिक कार्यक्रमों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और पारंपरिक भोजन के माध्यम से अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं।
विषु केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान और पारिवारिक एकता का प्रतीक है।
विषु 2026, 14 अप्रैल का यह पावन दिन, केरल में नए वर्ष की शुभ शुरुआत का प्रतीक है। विषु कानी की पहली झलक, कैनीट्टम की परंपरा, मंदिर पूजा और पारंपरिक भोज ये सभी मिलकर इस पर्व को खास बनाते हैं।
यह त्योहार हमें सिखाता है कि जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण, परिवार का साथ और आध्यात्मिक विश्वास ही सच्ची समृद्धि का आधार हैं। विषु का संदेश स्पष्ट है हर नई सुबह एक नया अवसर है। उसे आशा, आशीर्वाद और विश्वास के साथ स्वीकार करें।