Amalaki Ekadashi 2026 – तिथि, कथा, महत्व, पूजा विधि व उपवास नियम

Amalaki Ekadashi 2026 Puja Vidhi and Vrat Details

आमलकी एकादशी फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली अत्यंत पुण्यदायिनी और मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी मानी जाती है। इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा की जाती है क्योंकि पुराणों में वर्णित है कि आंवला स्वयं भगवान विष्णु का निवास स्थान है। Amalaki Ekadashi Vrat प्रायः पापों का नाश, आयु में वृद्धि, धन-संपन्नता और आध्यात्मिक उन्नति देने वाला माना जाता है। स्कंद पुराण में इस व्रत का विस्तृत वर्णन है और कहा गया है कि यह व्रत साधक को पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति दिलाने की शक्ति रखता है। यह एकादशी भक्ति, दान, तप, श्रद्धा और पवित्रता का प्रतीक है। जो भक्त इस व्रत का पालन करता है, उसके जीवन में सौभाग्य, यश और हर कार्य में सफलता प्राप्त होती है।

Amalaki Ekadashi – तिथि एवं समय

विवरणसमय / तिथि
एकादशी तिथि प्रारंभ26 फरवरी 2026, सुबह 10:16 बजे
एकादशी तिथि समाप्त27 फरवरी 2026, सुबह 08:12 बजे
पारण का समय28 फरवरी 2026, सुबह 06:51 बजे से 08:59 बजे तक
द्वादशी तिथि समाप्त28 फरवरी 2026, शाम 07:16 बजे

Amalaki Ekadashi Vrat Katha – आमलकी एकादशी की सम्पूर्ण कथा

स्कंद पुराण के अनुसार प्राचीन समय में वृहतनगर नाम का एक अत्यंत सुंदर और समृद्ध राज्य था, जहाँ चैत्ररथ नाम के राजा का शासन था। राजा धर्मपरायण, न्यायप्रिय और प्रजा के दुःखों का समाधान करने वाले आदर्श शासक माने जाते थे। उनके शासन में लोग भयमुक्त जीवन जीते थे, खेतों में हरियाली थी, व्यापार फल-फूल रहा था, और धर्म-कर्म के कार्य निरंतर चल रहे थे।

उस राज्य में वैदिक आचार, तप, तीर्थयात्रा और भगवान विष्णु की उपासना का बहुत महत्व था। वहीं नगर में एक पवित्र आंवले का विशाल वृक्ष था जिसे लोग अत्यंत श्रद्धा से पूजते थे, क्योंकि पुराणों में लिखा है कि आंवला स्वयं भगवान विष्णु तथा लक्ष्मी का निवास स्थान माना गया है

एक दिन फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी—अर्थात आमलकी एकादशी—का शुभ अवसर आया। राजा चैत्ररथ ने पूरे नगर में घोषणा करवाई कि सभी नागरिक इस दिन व्रत करें, भजन-कीर्तन करें और आंवले के वृक्ष की विशेष पूजा करें। पूरे राज्य में उत्सव जैसा वातावरण था। लोग नए वस्त्र पहनकर वृक्ष के पास एकत्र हुए, स्त्रियाँ मंगल गीत गा रही थीं, ब्राह्मण मंत्रोच्चारण कर रहे थे और राजा स्वयं आंवले के वृक्ष की पूजा कर रहे थे।

इसी समय वन में रहने वाला एक क्रूर राक्षस भी नगर की ओर आया। वह मनुष्यों और देवताओं दोनों का शत्रु था। जब वह उस स्थल पर पहुँचा जहाँ लोग आंवले के वृक्ष के पास पूजा कर रहे थे, तो पूजा की शक्ति, मंत्रों का प्रभाव और आंवले की दिव्यता के कारण वह बेचैन और भयभीत हो गया। उसने सोचा कि वह यहाँ हमला करेगा, परंतु जैसे ही वह आगे बढ़ा, दिव्य प्रकाश ने उसे रोक लिया।

राक्षस उस प्रकाश से घायल होकर वहीं गिर पड़ा और रातभर अचेत रहा। उस रात निरंतर भजन, मंत्र और पूजा चलती रही, जिसका प्रभाव राक्षस पर भी पड़ा। उसके भीतर वर्षों से जमी अशुद्धता और पाप की परतें टूटने लगीं।

सुबह द्वादशी के समय जब लोगों ने पारण किया, राक्षस ने धीरे-धीरे होश पाया। उसी क्षण एक दिव्य आकाशवाणी हुई—
“हे जीव! तेरा उद्धार हो चुका है। आमलकी एकादशी व्रत ने तेरे पाप नष्ट किए और तुझे नए स्वरूप में जन्म दिया। अब तू पुनः दिव्य लोक को प्राप्त होगा।”

यह सुनते ही राक्षस का शरीर तेजस्वी हो उठा और वह देवता के रूप में प्रकट होकर स्वर्ग चला गया। राजा चैत्ररथ और नगर के लोग यह दिव्य दृश्य देखकर स्तब्ध रह गए। उन्हें समझ आया कि आमलकी एकादशी केवल मनुष्यों ही नहीं, बल्कि किसी भी जीव को पापबंधन से मुक्त करने की क्षमता रखती है।

राजा ने इस घटना को पूरे नगर में घोषित करवाया और कहा:
आंवले के वृक्ष की पूजा और आमलकी एकादशी व्रत का पालन मनुष्य को मोक्ष, पवित्रता, स्वास्थ्य और सुख-संपत्ति प्रदान करता है। यह व्रत जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश करता है।

तभी से यह एकादशी संसार में अत्यंत पवित्र मानी जाती है। इस व्रत द्वारा किया गया उपवास, भक्ति, दान और आंवले की पूजा साधक को दिव्यता की ओर ले जाती है।

Amalaki Ekadashi Puja Vidhi – पूजा विधि

प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ, सात्त्विक वस्त्र पहनें। आंवले के वृक्ष या भगवान विष्णु की मूर्ति के सामने दीप, धूप, चंदन, रोली, अक्षत, पंचामृत, तुलसी दल और नैवेद्य अर्पित करें। Amalaki Ekadashi में आंवले के वृक्ष की परिक्रमा का विशेष महत्व बताया गया है। दिन भर व्रत रखकर भजन, किर्तन और विष्णु नामजप करें। गरीबों को भोजन, वस्त्र, आंवला, फल या दान देना इस व्रत का मुख्य अंग माना गया है। शाम को दीपदान करें और अगले दिन द्वादशी में पारण करके व्रत पूर्ण करें।

Amalaki Ekadashi Vrat Rules – व्रत के नियम

इस व्रत में सात्त्विकता, दया, अहिंसा और संयम का पालन अनिवार्य है। फाल्गुन शुक्ल एकादशी के दिन अनाज, चावल, दाल, मांसाहार, प्याज-लहसुन और तामसिक भोजन का सेवन वर्जित है। मन को शांत रखते हुए भगवान विष्णु का स्मरण करें। क्रोध, झूठ, लोभ, अपशब्द और किसी भी प्रकार की हिंसा से दूर रहें। आंवले के वृक्ष को प्रणाम करना और दान करना सबसे महत्वपूर्ण नियमों में से एक है। द्वादशी के पारण समय का पालन व्रत की सिद्धि के लिए अतिआवश्यक है।

क्या करें और क्या न करें

क्या करेंक्या न करें
आंवले के वृक्ष की पूजा व परिक्रमातामसिक भोजन (प्याज-लहसुन)
गरीबों को फल, वस्त्र, भोजन दान देंअनाज, चावल, दाल का सेवन
विष्णु नामजप और भजन करेंक्रोध, विवाद, कटु व्यवहार
सात्त्विक भोजन व फलाहारझूठ, अपशब्द, नकारात्मकता
दीपदान, पाठ और ध्यान करेंरात्रि में तामसिक गतिविधियाँ

FAQs - Amalaki Ekadashi Vrat

Q1. Amalaki Ekadashi 2026 का पालन करने से क्या लाभ होते हैं?
Amalaki Ekadashi 2026 व्रत का पालन करने से पापों का नाश होता है, आयु वृद्धि होती है और मनुष्य को मोक्ष प्राप्ति का मार्ग मिलता है। इस व्रत से घर में सुख-समृद्धि, शांति और प्राकृतिक ऊर्जा का संचार होता है।
पुराणों में लिखा है कि आंवला भगवान विष्णु का प्रिय वृक्ष है और इसे उनकी ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। Amalaki Ekadashi Vrat में आंवले की पूजा करने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है।
हाँ, फल, दूध, मेवा या सात्त्विक पदार्थ ग्रहण किए जा सकते हैं। अनाज और तामसिक भोजन पूरी तरह वर्जित है। फलाहार करने से व्रत की पवित्रता और शक्ति बनी रहती है।
हाँ, Amalaki Ekadashi 2026 व्रत स्त्री-पुरुष, गृहस्थ, विद्यार्थी और साधक—सभी के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। यह व्रत जीवन में सौभाग्य, धन, स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाता है।
द्वादशी के पारण समय में स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा करें और सात्त्विक भोजन से व्रत खोलें। शास्त्रों में बताया गया है कि पारण समय के पालन से ही व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

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