जरा देर ठहरो राम एक अत्यंत भावपूर्ण और हृदय को छू लेने वाला भजन है, जिसमें भगवान श्री राम के प्रति भक्तों का प्रेम और विरह भाव प्रकट होता है। इस भजन में अयोध्या वासियों की भावना को दर्शाया गया है, जब भगवान राम वनवास के लिए जा रहे होते हैं।
यह भजन भक्ति और प्रेम का सुंदर उदाहरण है, जिसे सुनकर मन भावुक हो जाता है और भगवान श्री राम के प्रति श्रद्धा और गहरी हो जाती है।
जरा देर ठहरो राम तमन्ना यही है,
अभी हमने जी भर के देखा नही है…
कैसी घडी आज, जीवन की आई,
अपने ही प्राणो की, करते विदाई,
अब ये अयोध्या, अब ये अयोध्या हमारी नहीं है,
अभी हमने जी भर के, देखा नहीं है….
माता कौशल्या की, आँखों के तारे,
दशरथ जी के हो, राज दुलारे,
कभी ये अयोध्या को, भुलाना नहीं है,
अभी हमने जी भर के, देखा नहीं है….
जाओ प्रभु अब, समय हो रहा है,
घरो का उजाला भी, कम हो रहा है,
अँधेरी निशा का, ठिकाना नहीं है,
अभी हमने जी भर के, देखा नहीं है….
जरा देर ठहरो राम, तमन्ना यही है,
अभी हमने जी भर के, देखा नहीं है……
इस भजन में अयोध्या वासियों का दुख और प्रेम दर्शाया गया है, जब भगवान राम वनवास के लिए जा रहे होते हैं। भक्त भगवान से विनती करते हैं कि वे कुछ समय और रुक जाएं, क्योंकि उनका प्रेम और लगाव बहुत गहरा होता है। यह भजन भक्ति और विरह का सुंदर मिश्रण है।
जरा देर ठहरो राम भजन का अर्थ क्या है?
यह भजन भगवान राम के प्रति भक्तों के प्रेम और विरह को दर्शाता है।
Jara Der Thahro Ram bhajan kab gaya jata hai?
यह भजन राम कथा और भजन संध्या में गाया जाता है।
क्या यह भजन रामायण से लिया गया है?
नहीं, यह भजन रामायण से प्रेरित एक भावपूर्ण भक्ति गीत है।