अगर नाथ देखोगे अवगुण हमारे एक अत्यंत भावपूर्ण और विनम्रता से भरा राम भजन है, जिसमें भक्त भगवान श्री राम से अपने दोषों और कमजोरियों के लिए क्षमा मांगता है। इस भजन में भगवान की करुणा और दया का सुंदर वर्णन किया गया है।
यह भजन हमें सिखाता है कि चाहे हम कितने भी दोषपूर्ण क्यों न हों, भगवान की शरण में जाकर हम उनकी कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
अगर नाथ देखोगे अवगुण हमारे,
तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे ॥
हमारे लिए क्यों देर किए हो,
हमारे लिए क्यों देर किए हो,
गणिका अजामिल को पल में उबारे,
गणिका अजामिल को पल में उबारे,
अगर नाथ देखोंगे अवगुण हमारे,
तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे ॥
पतितो को पावन करते कृपानिधि,
पतितो को पावन करते कृपानिधि,
किए पाप है इस सुयश के सहारे,
किए पाप है इस सुयश के सहारे,
अगर नाथ देखोंगे अवगुण हमारे,
तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे ॥
माना अगम है अपावन कुटिल है,
माना अगम है अपावन कुटिल है,
सबकुछ है लेकिन प्रभु हम तुम्हारे,
सबकुछ है लेकिन प्रभु हम तुम्हारे,
अगर नाथ देखोंगे अवगुण हमारे,
तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे ॥
अगर नाथ देखोगे अवगुण हमारे,
तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे ॥
इस भजन में भक्त भगवान से विनती करता है कि वे उसके दोषों को नजरअंदाज करें और उसे अपने शरण में ले लें। भक्त यह स्वीकार करता है कि वह पूर्ण नहीं है, लेकिन भगवान की कृपा से वह जीवन के दुखों से पार पा सकता है। यह भजन नम्रता, भक्ति और समर्पण का प्रतीक है।
Kya yeh bhajan satsang me gaya jata hai?