पकड़ लो बाँह रघुराई एक अत्यंत भावपूर्ण राम भजन है, जिसमें भक्त भगवान श्री राम से विनती करता है कि वे उसका सहारा बनें। इस भजन में जीवन की कठिनाइयों और भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण का सुंदर वर्णन किया गया है।
यह भजन भक्ति, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है, जिसे सुनकर मन को शांति मिलती है और भगवान श्री राम के प्रति श्रद्धा और भी गहरी हो जाती है।
पकड़ लो बाँह रघुराई, नहीं तो डूब जाएँगे ।
डगर ये अगम अनजानी, पथिक मै मूड अज्ञानी ।
संभालोगे नही राघव, तो कांटे चुभ जाएँगे ।
पकड़ लो बाँह रघुराई, नहीं तो डूब जाएँगे ।
नहीं बोहित मेरा नौका,नहीं तैराक मै पक्का ।
कृपा का सेतु बंधन हो, प्रभु हम खूब आएँगे ।
पकड़ लो बाँह रघुराई, नहीं तो डूब जाएँगे ।
नहीं है बुधि विधा बल, माया में डूबी मती चंचल ।
निहारेंगे मेरे अवगुण तो, प्रभु जी ऊब जाएँगे ।
पकड़ लो बाँह रघुराई, नहीं तो डूब जाएँगे ।
प्रतीक्षारत है ये आँगन, शरण ले लो सिया साजन ।
शिकारी चल जिधर प्रहलाद, जी भूल जाएँगे ।
पकड़ लो बाँह रघुराई,
नहीं तो डूब जाएँगे ।
नहीं तो डूब जाएँगे,
नहीं तो डूब जाएँगे ।
इस भजन में भक्त भगवान श्री राम से प्रार्थना करता है कि वे उसकी जीवन यात्रा में मार्गदर्शन करें। वह स्वीकार करता है कि वह कमजोर और अज्ञानी है, और बिना भगवान के सहारे जीवन के कठिन मार्ग पर आगे बढ़ना संभव नहीं है। यह भजन पूर्ण समर्पण और विश्वास का प्रतीक है।
Pakad Lo Bah Raghurai bhajan ka kya arth hai?
यह भजन भगवान राम से सहायता और मार्गदर्शन की प्रार्थना करता है।
Pakad Lo Bah Raghurai bhajan kab gaya jata hai?
यह भजन भजन संध्या और सत्संग में गाया जाता है।
Kya yeh Ram bhajan popular hai?
हाँ, यह एक लोकप्रिय और भावपूर्ण राम भजन है।