चित्रई तिरुविझा: मदुरै में दिव्य विवाह और उत्सव का महीना

मदुरै की सुबह कुछ अलग होती है जब चित्रई का महीना शुरू होता है। मंदिर के गोपुरम पर सुनहरी रोशनी गिरती है, गलियों में फूलों की खुशबू फैलती है, और हर दिशा से शंखध्वनि सुनाई देती है। दुकानों के बाहर रंगोली सजी होती है, और लोग पारंपरिक वस्त्रों में सजे हुए मंदिर की ओर बढ़ते […]
त्रिशूर पूरम: केरल की धरती पर आस्था, कला और उल्लास का महासंगम

दोपहर की धूप जैसे-जैसे तेज होती है, त्रिशूर शहर की धड़कन भी तेज होने लगती है। सड़कों पर उमड़ती भीड़, पारंपरिक वस्त्रों में सजे लोग, और हवा में गूंजती चेंडा की ताल सब कुछ संकेत देता है कि आज कोई साधारण दिन नहीं है। यह वह क्षण है जिसका इंतज़ार पूरे वर्ष किया जाता है। […]
पंगुनी उथिरम: जब दिव्य विवाहों की गूंज से भर उठता है आकाश

दोपहर की धूप अभी तीखी नहीं हुई थी। मंदिर के ऊँचे गोपुरम पर रंगीन ध्वज लहरा रहे थे। कहीं शहनाई की मधुर धुन, कहीं वेद मंत्रों की गूंज, और कहीं फूलों से सजी पालकी की तैयारी। वातावरण में एक उत्सव का भाव था, पर यह उत्सव केवल सजावट का नहीं यह प्रेम, विश्वास और दिव्य […]
गंगा सप्तमी: धरती पर उतरी दिव्यता की धारा

रात के अंतिम पहर का समय था। आसमान हल्के नीले रंग में घुलने लगा था और पूर्व दिशा में सूरज की किरणें धीरे-धीरे झाँक रही थीं। मैं घाट की सीढ़ियों पर बैठा था। सामने बहती गंगा की धारा, शांत और निरंतर… जैसे वह कुछ कह रही हो। जल की हर लहर में एक कहानी थी, […]
एक ऐसा दिन जब आप खुद को थोड़ा संभालते हैं, और जिंदगी खुद-ब-खुद संभलने लगती है

कभी-कभी जिंदगी में सब कुछ ठीक होते हुए भी अंदर एक बेचैनी रहती है। ना कोई बड़ी समस्या होती है, फिर भी मन शांत नहीं होता। ऐसे समय में हम बाहर समाधान ढूंढते हैं लेकिन कई बार जवाब अंदर ही छिपा होता है। वरुथिनी एकादशी ऐसा ही एक दिन है, जो हमें धीरे से याद […]
एक शांत दिन जो हमें हमारी जड़ों की याद दिलाता है

हमारी रोज़ की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में शायद ही कभी ऐसा मौका मिलता है जब हम रुककर पीछे देखें यह सोचें कि हम कहाँ से आए हैं, किन लोगों की वजह से आज यहाँ तक पहुँचे हैं। वैशाख अमावस्या ऐसा ही एक दिन है, जो हमें धीरे से यह याद दिलाता है कि हमारी कहानी […]
हर महीने खुद से जुड़ने का एक शांत मौका

हम में से ज़्यादातर लोग शिवरात्रि का नाम सुनते ही महाशिवरात्रि की भव्य तस्वीर सोच लेते हैं भीड़, मंदिरों की लंबी लाइनें, खास पूजा और एक बड़ा उत्सव। लेकिन सच ये है कि हर महीने आने वाली मासिक शिवरात्रि भी उतनी ही खास होती है बस उसका तरीका थोड़ा अलग होता है। 15 अप्रैल को […]
संकष्टी चतुर्थी: एक दिन, जब मन अपने विघ्नों से संवाद करता है

हर महीने की चतुर्थी यूँ तो कैलेंडर में एक साधारण तिथि लगती है, लेकिन जब वह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी होती है, तो कई घरों में सुबह की शुरुआत थोड़ी अलग होती है। रसोई शांत रहती है, पूजा की थाली सजी होती है, और मन में एक संकल्प लिया जाता है आज संकष्टी चतुर्थी का […]
चैत्र पूर्णिमा व्रत: एक शांत रात, जब मन थोड़ा हल्का हो जाता है

कुछ दिन ऐसे होते हैं जो बहुत ज़्यादा दिखते नहीं, लेकिन महसूस बहुत होते हैं। चैत्र पूर्णिमा भी वैसा ही एक दिन है। न इसमें ज़्यादा शोर होता है, न बड़ी तैयारियाँ फिर भी इसका असर धीरे-धीरे मन में उतरता है। चैत्र महीने की यह पूर्णिमा अक्सर एक ठहराव जैसा महसूस होती है। जैसे लगातार […]
अक्षय तृतीया: एक ऐसा दिन, जो कभी कम नहीं होता

कभी-कभी कैलेंडर में एक तारीख साधारण दिखती है, लेकिन उसका अर्थ बहुत गहरा होता है। अप्रैल की हल्की धूप, न बहुत तेज़, न बहुत मद्धम ऐसे ही मौसम में आती है अक्षय तृतीया। इस दिन के बारे में कहा जाता है कि जो भी शुभ कार्य शुरू किया जाए, उसका फल कभी क्षय नहीं होता। […]