रक्षाबंधन केवल भाई की कलाई पर राखी बांधने का पर्व नहीं है। यह वह अवसर भी है, जब बहन पूरे मन से अपने भाई के सुख, अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना करती है। हमारे घरों में अक्सर देखा जाता है कि राखी बांधते समय मां या दादी किसी मंत्र का उच्चारण करती हैं। कई लोगों को यह परंपरा बचपन से याद होती है, लेकिन समय के साथ मंत्र भूल जाते हैं।
अगर आप भी इस बार रक्षाबंधन पर पूरे विधि-विधान के साथ पूजा करना चाहते हैं, तो सबसे पहले यह जान लीजिए कि मंत्र का उद्देश्य केवल शब्द बोलना नहीं है। असली महत्व उस श्रद्धा और विश्वास का है, जिसके साथ उसे बोला जाता है।
राखी बांधते समय सनातन परंपरा में सबसे अधिक प्रचलित मंत्र यह माना जाता है –
येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥
यह मंत्र राजा बलि से जुड़ी कथा का स्मरण कराता है। इसका भाव यह है कि जिस पवित्र रक्षा सूत्र ने महाबली राजा बलि की रक्षा की थी, वही रक्षा शक्ति तुम्हारे जीवन में भी बनी रहे। इसलिए बहन जब यह मंत्र बोलते हुए राखी बांधती है, तो वह अपने भाई के लिए ईश्वर से सुरक्षा, सुख और लंबी आयु की प्रार्थना करती है।
बहुत से लोगों के मन में यह सवाल आता है कि अगर संस्कृत मंत्र ठीक से याद न हो, तो क्या पूजा अधूरी मानी जाएगी?
सनातन धर्म की परंपरा कहती है कि ईश्वर तक पहुंचने का सबसे सरल मार्ग सच्ची भावना है। अगर मंत्र याद नहीं है, तो भगवान शिव, भगवान विष्णु या अपने इष्ट देव का नाम लेकर भी भाई के लिए मन से प्रार्थना की जा सकती है।
कई परिवारों में बहन केवल इतना कहती है भगवान आपको हमेशा स्वस्थ रखें और लंबी उम्र दें। यह भी उतनी ही पवित्र भावना मानी जाती है।
रक्षाबंधन की पूजा में अलग-अलग परिवारों की अपनी परंपराएं होती हैं। फिर भी अधिकतर लोग भगवान विष्णु, भगवान शिव, श्रीगणेश और माता लक्ष्मी का स्मरण करते हैं।
भगवान शिव से उत्तम स्वास्थ्य और संकटों से रक्षा की प्रार्थना की जाती है। भगवान विष्णु से जीवन में स्थिरता और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगा जाता है। वहीं श्रीगणेश से सभी विघ्न दूर करने की कामना की जाती है।
अगर परिवार की कोई विशेष कुलदेवी या कुलदेवता हों, तो उनका स्मरण करना भी शुभ माना जाता है।
रक्षाबंधन की पूजा में सबसे जरूरी बात मन की शुद्धता मानी गई है। पूजा शुरू करने से पहले स्नान करें, साफ वस्त्र पहनें और पूजा की थाली में राखी, रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई और फूल रख लें।
राखी बांधते समय जल्दबाजी न करें। पहले भाई के माथे पर तिलक लगाएं, फिर अक्षत चढ़ाएं और उसके बाद रक्षा सूत्र बांधते हुए मंत्र का उच्चारण करें। यदि मंत्र पूरा याद न हो, तो धीरे-धीरे पढ़कर भी बोला जा सकता है।
पूजा के अंत में भाई की आरती उतारें, मिठाई खिलाएं और भगवान से उसके सुखी जीवन की प्रार्थना करें।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी भी मंत्र का प्रभाव तभी माना जाता है जब उसके साथ श्रद्धा और सच्ची भावना जुड़ी हो। केवल जल्दी-जल्दी मंत्र पढ़ लेने से पूजा का उद्देश्य पूरा नहीं होता।
रक्षाबंधन का सबसे बड़ा संदेश प्रेम और विश्वास है। इसलिए अगर बहन पूरे मन से अपने भाई की खुशहाली की कामना करती है, तो वही इस पर्व की सबसे बड़ी पूजा मानी जाती है।
आजकल राखियों के डिजाइन बदल गए हैं, त्योहार मनाने का तरीका भी पहले जैसा नहीं रहा। फिर भी एक बात आज भी नहीं बदली बहन की दुआ।
राखी का धागा कुछ दिनों बाद कलाई से उतर जाता है, लेकिन उसके साथ जुड़ी शुभकामनाएं हमेशा दिल में बनी रहती हैं। यही वजह है कि हर साल रक्षाबंधन का इंतजार केवल एक रस्म निभाने के लिए नहीं, बल्कि रिश्तों को फिर से प्यार और विश्वास के साथ जोड़ने के लिए किया जाता है।
रक्षाबंधन पर भाई की लंबी उम्र के लिए येन बद्धो बलिराजा मंत्र का जप सबसे अधिक प्रचलित माना जाता है। लेकिन सनातन धर्म यह भी सिखाता है कि मंत्र से पहले मन की पवित्रता जरूरी है। जब बहन सच्चे मन से अपने भाई के लिए सुख, स्वास्थ्य और लंबी आयु की प्रार्थना करती है, तभी रक्षा सूत्र का वास्तविक महत्व पूरा होता है। यही भावना रक्षाबंधन को केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और आशीर्वाद का पावन पर्व बनाती है।