किसी संत को समझना हो तो सिर्फ उनके शब्द सुन लेना काफी नहीं होता। यह भी देखना पड़ता है कि वे किस भूमि पर बैठे हैं, किस वातावरण में सांस लेते हैं, और किस धड़कन के साथ अपना संदेश देते हैं। प्रेमानंद जी महाराज के जीवन को यदि किसी एक जगह से जोड़ा जाए, तो वह है वृंदावन।
वृंदावन उनके लिए केवल निवास स्थान नहीं, बल्कि साधना की धरती, भक्ति का केंद्र और उनके आध्यात्मिक जीवन की धुरी है।
वृंदावन का नाम आते ही मन में अपने आप एक अलग भाव उठता है। संकरी गलियाँ, मंदिरों की घंटियाँ, सुबह-सुबह गूंजता राधे-राधे, यमुना किनारे की शांति यह सब मिलकर ऐसा वातावरण बनाते हैं, जहाँ मन अपने आप धीमा हो जाता है। कहते हैं कि कुछ स्थानों पर पहुंचते ही भीतर की बेचैनी कम होने लगती है। वृंदावन उन्हीं स्थानों में से एक है।
प्रेमानंद जी महाराज के जीवन में इस भूमि का गहरा प्रभाव दिखाई देता है। उनकी वाणी में माधुर्य है, उनकी कथाओं में राधा-कृष्ण की लीला का रस है, और उनके भावों में एक कोमलता है यह सब वृंदावन की ही देन है। वे केवल वृंदावन में रहते नहीं, बल्कि वृंदावन को जीते हैं।
वृंदावन में स्थित श्री हित राधा केली कुंज उनके सत्संग और भक्ति का प्रमुख केंद्र है। लेकिन इसे सिर्फ आश्रम कहना शायद उसके महत्व को छोटा कर देना होगा। यह एक जीवंत आध्यात्मिक केंद्र है।
यहाँ लोग केवल प्रवचन सुनने नहीं आते, बल्कि अनुभव लेने आते हैं। सुबह और शाम का भजन, कीर्तन, नाम-स्मरण – यह सब मिलकर ऐसा वातावरण बना देते हैं जहाँ मन अपने आप भीतर की ओर मुड़ने लगता है।
जब प्रेमानंद जी महाराज कथा कहते हैं, तो वह केवल ज्ञान की बातें नहीं होतीं। वे जीवन की साधारण घटनाओं से आध्यात्मिक अर्थ निकालते हैं। उनकी भाषा कठिन नहीं होती। वे ऐसे उदाहरण देते हैं जो हर घर-परिवार से जुड़े होते हैं। यही कारण है कि वहाँ बैठा व्यक्ति यह महसूस करता है कि बात सीधे उसी के जीवन से जुड़ी है।
हम अक्सर सोचते हैं कि आध्यात्मिकता केवल मन की बात है, स्थान का उससे क्या संबंध? लेकिन सच यह है कि वातावरण का असर पड़ता है। जैसे किसी शांत पहाड़ी जगह पर जाने से मन अपने आप शांत हो जाता है, वैसे ही पवित्र स्थलों का भी मन पर प्रभाव होता है।
वृंदावन की विशेषता यह है कि यहाँ हर कदम पर भक्ति का इतिहास जुड़ा है। मंदिरों, कुंजों और घाटों की कहानियाँ लोगों के मन में श्रद्धा जगाती हैं।
ऐसे वातावरण में बैठकर जब कोई साधना करता है, तो उसका मन जल्दी एकाग्र होता है। प्रेमानंद जी महाराज का आध्यात्मिक केंद्र इसी पवित्र भूगोल का हिस्सा है। इसलिए वहाँ की साधना केवल व्यक्तिगत प्रयास नहीं रहती, बल्कि सामूहिक ऊर्जा का सहारा भी मिल जाता है।
उनके पास आने वाले लोग केवल समाधान नहीं, दिशा लेकर जाते हैं। वे बताते हैं कि भक्ति कोई भागना नहीं है, बल्कि जीवन को सही दृष्टि से देखने का तरीका है। संसार में रहते हुए भी मन को भगवान से जोड़ा जा सकता है।
श्री हित राधा केली कुंज में यही शिक्षा बार-बार दोहराई जाती है सादगी, सेवा और नाम-स्मरण।
प्रेमानंद जी महाराज का आध्यात्मिक जीवन वृंदावन से अलग नहीं किया जा सकता। यह भूमि उनकी साधना की साक्षी है, और उनका सत्संग इस भूमि की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। वृंदावन उन्हें आधार देता है, और वे वृंदावन की भक्ति को लोगों तक पहुँचाते हैं।
शायद यही कारण है कि वहाँ जाने वाले लोग केवल प्रवचन नहीं सुनते वे एक वातावरण महसूस करते हैं। और कभी-कभी, वही वातावरण भीतर कुछ बदल देता है।