रक्षाबंधन का नाम सुनते ही सबसे पहले भाई की कलाई पर बंधी राखी और बहन के हाथ में सजी पूजा की थाली याद आती है। घर में उस दिन सुबह से ही कुछ अलग माहौल रहता है। कोई मिठाई लेने बाजार जा रहा होता है, कोई राखी पसंद कर रहा होता है और कई घरों में बहनें पूजा की तैयारी में लगी रहती हैं।
लेकिन जब पूजा का समय आता है, तो अक्सर एक सवाल सामने खड़ा हो जाता है रक्षाबंधन की पूजा में क्या-क्या रखना चाहिए और राखी बांधने की सही विधि क्या है? अगर आप भी इस बार पूरे तरीके से पूजा करना चाहते हैं, तो इसकी तैयारी बहुत मुश्किल नहीं है। घर में रखी सामान्य पूजा सामग्री से ही यह रस्म आसानी से पूरी हो सकती है।
राखी की पूजा के लिए बाजार से बहुत लंबी सूची बनाने की जरूरत नहीं है। एक साफ पूजा की थाली लें और उसमें सबसे पहले राखी रखें।
इसके साथ रोली या कुमकुम, साबुत चावल, फूल, दीपक, धूप या अगरबत्ती, मिठाई और थोड़ा-सा जल रख सकते हैं। कई परिवार नारियल और कलावा भी रखते हैं। अगर आपके घर में कोई खास पारिवारिक परंपरा है, तो उसके अनुसार दूसरी सामग्री भी शामिल की जा सकती है।
सबसे अच्छी बात यह है कि पूजा की सामग्री को लेकर बहुत ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं होती। जो चीज श्रद्धा से उपलब्ध हो, उसी से पूजा की जा सकती है।
रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। इसके बाद घर की पूजा वाली जगह को साफ कर लें। भगवान गणेश और अपने इष्ट देव का स्मरण करके दीपक जला सकते हैं। जिन घरों में कुलदेवता की पूजा की परंपरा है, वहां पहले उनकी पूजा की जाती है।
इसके बाद राखी की थाली तैयार करके रख दें। कोशिश करें कि पूजा के समय घर में ज्यादा भागदौड़ न हो। आखिर त्योहार का मजा तभी है, जब परिवार के लोग कुछ देर आराम से साथ बैठ सकें।
जब भाई पूजा के लिए बैठ जाए, तो सबसे पहले उसके माथे पर रोली या कुमकुम का तिलक लगाएं। इसके बाद तिलक के ऊपर अक्षत लगाएं। अब भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधें। राखी बांधते समय बहन अपने भाई के अच्छे स्वास्थ्य, लंबी उम्र और सुखी जीवन की कामना करती है।
राखी बांधने के बाद भाई की आरती उतारी जा सकती है। फिर उसे मिठाई खिलाएं। इसके बाद भाई अपनी बहन को उपहार देता है और उसके अच्छे भविष्य की कामना करता है। यही वह छोटा-सा पल होता है, जिसका इंतजार दोनों पूरे साल करते हैं।
यह सवाल बहुत से लोगों के मन में रहता है। अगर आपके घर में राखी बांधते समय कोई पारंपरिक मंत्र बोला जाता है, तो आप उसका जाप कर सकते हैं।
लेकिन अगर आपको मंत्र याद नहीं है, तो चिंता करने की कोई जरूरत नहीं। भगवान का नाम लेकर भाई की खुशी और अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करना भी पर्याप्त है।
पूजा में सिर्फ मंत्रों का उच्चारण ही महत्वपूर्ण नहीं होता। मन में श्रद्धा और अच्छी भावना होना भी उतना ही जरूरी माना जाता है।
हिंदू परंपरा में किसी भी शुभ कार्य से पहले मुहूर्त देखने की आदत काफी पुरानी है। रक्षाबंधन पर भी राखी बांधने के समय का ध्यान रखा जाता है। विशेष रूप से भद्रा काल में राखी बांधने से बचने की धार्मिक मान्यता है। इसलिए त्योहार वाले दिन अपने शहर के पंचांग के अनुसार शुभ समय देख लेना बेहतर रहेगा।
अगर घर में दादा-दादी या परिवार के बुजुर्ग हैं, तो उनसे भी इस बारे में सलाह ली जा सकती है। कई परिवार आज भी त्योहार की पूजा और मुहूर्त की जानकारी घर के बड़े लोगों से ही लेते हैं।
मान लीजिए पूजा के समय फूल नहीं मिले या नारियल घर पर नहीं है। ऐसे में परेशान होने की जरूरत नहीं है। रक्षाबंधन की पूजा कोई ऐसी प्रक्रिया नहीं है जिसमें एक चीज कम होने पर पूजा पूरी ही न हो सके। राखी, तिलक, अक्षत और मिठाई जैसी सामान्य सामग्री के साथ भी रस्म पूरी की जा सकती है।
आखिर पूजा की थाली कितनी बड़ी है, इससे ज्यादा मायने यह रखता है कि पूजा किस भावना से की जा रही है।
भारत में रक्षाबंधन अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है। किसी घर में पहले भाई की आरती होती है, तो कहीं तिलक लगाकर सीधे राखी बांधी जाती है।
कुछ परिवारों में भाई को नारियल दिया जाता है, तो कहीं मिठाई और कपड़े देने की परंपरा होती है। इन सबमें कोई एक तरीका ही जरूरी नहीं है। घर की पुरानी परंपरा को निभाना भी इस त्योहार की खूबसूरती है।
अगर सच में पूछा जाए तो रक्षाबंधन की सबसे जरूरी चीज राखी या पूजा की सामग्री नहीं है। सबसे जरूरी है रिश्ते में प्यार और सम्मान। बहन जब भाई की कलाई पर राखी बांधती है, तो उसके मन में सिर्फ एक रस्म पूरी करने की भावना नहीं होती। उसके साथ बचपन की यादें, भाई की चिंता और उसके अच्छे भविष्य की दुआ भी जुड़ी होती है।
भाई के लिए भी यह दिन अपनी बहन को यह एहसास कराने का मौका होता है कि वह उसके लिए हमेशा खास रहेगी।
रक्षाबंधन की पूजा को लेकर बहुत ज्यादा उलझने की जरूरत नहीं है। घर की सफाई करें, पूजा की थाली तैयार करें, भगवान का स्मरण करें और शुभ समय में भाई की कलाई पर राखी बांधें।
इस पूरे दिन में पूजा की विधि जितनी महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी है परिवार के साथ बैठना और खुशियां बांटना। क्योंकि कुछ साल बाद शायद हमें पूजा में इस्तेमाल हुई हर सामग्री याद न रहे, लेकिन उस दिन भाई-बहन के बीच हुई हंसी-मजाक और साथ बिताए पल जरूर याद रहेंगे। यही रक्षाबंधन की असली खूबसूरती है एक छोटा-सा धागा, लेकिन उससे जुड़ी भावनाएं बहुत बड़ी।