रक्षाबंधन का दिन आते ही घर का माहौल अपने आप बदल जाता है। कहीं राखियां चुनी जा रही होती हैं, कहीं मिठाइयों की तैयारी चल रही होती है और कहीं भाई-बहन इस बात पर मजाक कर रहे होते हैं कि इस बार उपहार क्या मिलेगा।
दिलचस्प बात यह है कि बचपन में जिस राखी को हम सिर्फ एक रंगीन धागा समझते थे, बड़े होने पर उसी की अहमियत समझ में आने लगती है। यह धागा सिर्फ कलाई पर नहीं बंधता, बल्कि रिश्तों की मिठास को भी मजबूत करता है।
अगर आप इस साल रक्षाबंधन मनाने की तैयारी कर रहे हैं, तो सबसे पहले सही तारीख, शुभ समय और पूजा का आसान तरीका जान लेते हैं।
साल 2026 में रक्षाबंधन 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इसी दिन श्रावण पूर्णिमा भी रहेगी। हर बार की तरह इस साल भी लोग सबसे पहले यही जानना चाहते हैं कि राखी किस समय बांधना सही रहेगा। वजह साफ है हर कोई चाहता है कि यह शुभ काम अच्छे मुहूर्त में ही हो।
अगर आपने कभी घर के बड़े-बुजुर्गों को कहते सुना हो कि अभी भद्रा चल रही है, थोड़ा इंतजार करो, तो इसके पीछे धार्मिक मान्यता है। मान्यता के अनुसार भद्रा काल में राखी बांधने से बचना चाहिए। इसलिए अधिकांश परिवार भद्रा समाप्त होने के बाद ही पूजा शुरू करते हैं।
हालांकि एक बात हमेशा याद रखें कि मुहूर्त हर शहर में कुछ मिनटों का अंतर लेकर आ सकता है। इसलिए अपने शहर का पंचांग देखना सबसे सही रहता है।
रक्षाबंधन की खूबसूरती ही यही है कि इसकी पूजा बहुत सरल होती है। एक थाली में राखी, रोली, चावल, दीपक, थोड़ी-सी मिठाई और कुछ फूल रख दीजिए। बस इतनी तैयारी काफी होती है।
कई घरों में नारियल भी रखा जाता है, जबकि कुछ परिवार अपनी पुरानी परंपराओं के अनुसार पूजा करते हैं। दोनों ही तरीके अपनी जगह सही हैं।
जब पूरा परिवार एक साथ बैठ जाए, तब पूजा शुरू करें। सबसे पहले भाई के माथे पर तिलक लगाएं। फिर अक्षत लगाकर उसकी कलाई पर राखी बांधें। राखी बांधते समय मन ही मन भगवान से यही प्रार्थना करें कि भाई स्वस्थ रहे, खुश रहे और जीवन में हमेशा आगे बढ़ता रहे।
इसके बाद मिठाई खिलाइए, थोड़ी हंसी-मजाक कीजिए और अगर घर की परंपरा हो तो आरती भी उतार लीजिए। सच कहें तो इसी पल का इंतजार पूरे साल रहता है।
समय के साथ बहुत कुछ बदल गया है। अब कई भाई-बहन एक ही शहर में नहीं रहते। कोई नौकरी के लिए बाहर है, कोई पढ़ाई के लिए। लेकिन रक्षाबंधन आने पर कोशिश यही रहती है कि किसी न किसी तरह बात हो जाए।
अगर मिलना संभव नहीं होता, तो वीडियो कॉल पर ही हंसी-मजाक हो जाता है। राखी पहले ही कुरियर से पहुंच जाती है। इससे एक बात समझ आती है कि रिश्ते दूरी से नहीं, अपनापन से चलते हैं।
महंगे उपहार, बड़ी-बड़ी मिठाइयां और शानदार फोटो ये सब अपनी जगह ठीक हैं। लेकिन कई साल बाद जब रक्षाबंधन याद आता है, तो सबसे पहले यही याद आता है कि घर में कितना हंसी-मजाक हुआ था, मां कितनी बार आवाज लगा रही थीं और राखी बांधने के बाद भाई ने क्या मजेदार बहाना बनाया था। शायद यही छोटी-छोटी बातें इस त्योहार को इतना खास बना देती हैं।
रक्षाबंधन 2026 भी एक बार फिर वही मौका लेकर आएगा, जब परिवार कुछ देर के लिए अपनी व्यस्त जिंदगी से निकलकर एक साथ बैठेगा।
राखी का धागा भले ही पतला हो, लेकिन यह रिश्तों को मजबूत करने की ताकत रखता है। इसलिए इस बार सिर्फ शुभ मुहूर्त देखकर राखी मत बांधिए, बल्कि थोड़ा समय अपने भाई या बहन के साथ भी बिताइए। कई बार यही पल आने वाले वर्षों की सबसे खूबसूरत याद बन जाते हैं।